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Nov 4, 2016

A Letter to Life #DearZindagi Activity

“I am writing a letter to life for the #DearZindagi activity at BlogAdda“.

डियर  ज़िन्दगी

सबसे पहले तो मैं तुझे अपने में मुझे बनाये रखने और अपनी साँसों को मेरी सांसों में समाये - बनाये रखने के लिए बहुत – बहुत धन्यवाद देती हूँ. तू है तो मैं हूँ, जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं. मैं यह पत्र इसलिए लिख रही हूँ ताकि मैं तुम्हें यह बता सकूँ कि मैं तुम्हें अपने में पाकर कैसा महसूस कर रही हूँ.

तुम्हारे कितने रूप हैं. कुछ ऐसे पल होते हैं जिनको याद कर मैं बहुत खुश हो जाती हूँ, कुछ लम्हे ऐसे भी हैं, जो आज भी याद आती हैं तो रोम-रोम पुलकित हो जाती हैं. कुछ पल उदास भी कर जाती हैं. यदि मैं उन लम्हों का लेखा-जोखा तैयार करूँ तो एक ग्रन्थ तैयार हो जाए.

आज मैं इस पत्र में उन सुखद एहसासों का जिक्र करना चाहूंगी जिसने मुझे जीने के नए मायने दिए हैं.
बचपन की वो यादें आजतक मैंने बहुत ही सहेज कर रखी हैं. जब मैं अपने बाबुल के आँगन में फुदकती रहती थी. प्यार और दुलार से सराबोर तुम न जाने कब मुझे यौवन की दहलीज पर लाकर छोड़ दिया.

यौवन का एहसास आते ही मन रोमांचित हो उठता है. पढाई-लिखाई के साथ साथ साजन की बातें, प्यार – मोहब्बत की बातें मन को कभी-कभी विचलित कर जाती थीं.

जिसकी ज़िन्दगी में प्यार न हो उसका जीवन बेकार. तुम्हारा दूसरा नाम प्यार भी है. कहते हैं प्यार, इश्क और मोहब्बत सभी अधूरे होते हैं. एक में आधा है. एक में आधा है तो एक में आधाहै. लेकिन यह सिर्फ कहने की बात है. एक प्यार भरी ज़िन्दगी सुखद एहसास भरी होती है.

तुमने मुझे हर तरह का प्यार दिया, हर एक एहसास दिया. मां बाप का प्यार, भाई- बहन का प्यार, जीवन साथी का प्यार और बच्चों का प्यार.

लोग तुमसे शिकवा और शिकायत भी करते हैं कि मेरे ज़िन्दगी भी कोई ज़िन्दगी है, वगैरह, वगैरह. लेकिन ऐसे लोग न तुम्हें जान पाते हैं और न ही तुम्हारी कदर कर पाते हैं. तू ही तो पहचान है, तुझसे ही हर अरमान है, तू ही तो वरदान है. तेरी अनुकम्पा से ही दुनिया के विविध रूपों को देखने का अवसर मिलता है. तू नहीं तो मानव तन मिट्टी का माधो!


मैं कुछ पलों का जिक्र करना चाहूंगी, जिसे आज भी याद कर मुझे बहुत सुखद एहसास होता है. जब तूने मेरी गोद में एक नन्ही-सी परी का सुख दिया, माँ की ममता जाग उठी और उस समय को, और उस घड़ी को याद कर बहुत सुखद आनंद मिलता है. प्रसव वेदना के पश्चात नन्हीं परी का आगमन, और उसको गोद में लेने के बाद अवर्णनीय सुख का एहसास; यही तो तुम्हारी ख़ासियत है.

ज़िन्दगी का नाम जीने में है. तुमसे क्या विरोध? तुम्हारे बिना सब सून! तुमने मुझे आजतक जो कुछ भी दिया है, इसके लिए मैं तुम्हारी शुक्रगुजार हूँ. तुम तो जानती हो कि दुःख और वेदना के भी कुछ पल आये. खोने और रोने के भी पल आये. लेकिन तुमने मुझे उनसे लड़ना सिखाया. मैं उनसे भिड़ी, लड़ी और आगे  बढ़ी. ज़िन्दगी में अमृत है तो गरल भी है. तुमने दोनों को स्वीकारने की शक्ति दी. तुम मेरे हर पल की सहेली हो. तुम मेरी ऐसी सखी हो, जिसे मेरे बारे में सब पता है. मैं चाहकर भी तुमसे पृथक नहीं हो सकती. तुम हो, तो ही मैं हूँ. तुमसे ही मेरा नाम, मेरा काम, मेरा दाम और मेरा सुबहो-शाम है. तुमसे ही जीवन, तुमसे ही उल्लास, तुमसे ही आत्मा और तुमसे ही परमात्मा है.

इसी तरह से मेरा संबल बनी रहो.

तुम्हारी सहेली

सुमन



Oct 23, 2016

Dhruv Jaisi Siddhi ध्रुव जैसी सिद्धि

हमारे देश में कई वीर और विशिष्ट बालक हुए हैं. जैसे  अर्जुन, एकलव्य,प्रहलाद आदि. ये बालक अपने लक्ष्य को पाने हेतु किये गए प्रयासों के लिए आज हमारे लिए दृष्टांत बन गए हैं. ध्रुव  की साधना तथा लक्ष्य सिद्धि की कथा बहुत ही प्रेरणादायक है.


ध्रुव के जीवन चरित्र को लेकर श्री चन्द्रशेखर पाण्डेय ‘चन्द्र्मणी’जी ने बड़ी ही सुंदर कविता लिखी है. जिसे कल्याण के बालक अंक में छपा गया है. मैंने चन्द्रमणि जी की कविता साभार लिया है. यह कविता इस प्रकार है -

(1)
“जन्म ही हुआ था जिसका तपोवनों के बीच,
वनवासियों ने  सूतिका - गृह   संवारा था
शीतल-सुगंध-मंद  मलय    समीर   द्वारा
दोलित   लताओं   ने  समोद पुचकारा था
यद्दपि   न  पाया  मोद   पितृ   गोद   का,
परन्तु माता करूणामयी ने प्रेम से दुलारा था
प्यारा था सभी को प्राण से भी वह बाल ध्रुव,
 संतत-सुनीति-नयनों का बना तारा

 (2)

आया था बुलाने से पिता की गोद में बैठने को,
किन्तु हा ! विमाता का कतु-वचन सुनना पड़ा
वचन नहीं,   बाण थे,  हुए हिय के पार,
अन्तर की वेदना से सिर धुनना पड़ा ||
आन का महान अपमान हो गया था, इस
हेतु चिन्तन में कुछ और गुनना पड़ा |
ध्रुव नाम सार्थक बनाने को धरा के बीच,
घोर तप का प्रशस्त पथ चुनना पड़ा ||


(3)

नारद से पा के उपदेश, मधुबन जाके,
तन को तुरीय तपश्चर्या में मिला दिया |
प्यासे प्रन्धारियों को, प्राणवीर बालक ने 
हरिनाम कीर्तन का अमृत पिला दिया ||
ध्यान योग-सिद्धि से समाधि की दशा को प्राप्त
‘चन्द्र्मणी’ मानवों को सिखला दिया |
श्वासन को जीत, लिया आसन था इस तौर,
विष्णु भुजगासन  का आसन हिला दिया ||

(4)

पाके वर विष्णु से विशेष लोक का प्रसाद,
भक्त ध्रुव का स्वागत ही विचित्र हो गया |
समदृष्टि, दृष्टि में रमा था रमणीय रूप,
तन-मन-जीवन   सभी पवित्र हो गया ||
‘चन्द्र्मणी’  चाहना रही न चल सम्पदा की, 
चौदहों-भुवन-चन्द्रिका  चरित्र हो गया |
वनवास राज्य के सुखों का चलचित्र हुआ,
कल जो बना था शत्रु, आज मित्र हो गया |

(5)

शुद्ध सात्विकी स्वभाव, सत्संगति से 
जीवन में भक्ति धन अधिक कम लिया |
‘चन्द्र्मणी’ चक्रवर्ति राज्य से वीराः रहा,
अंगराग नहीं, तन भस्म ही रमा लिया ||
शासन में पूर्ण अनुशासन प्रज्ञा पी रहा,
त्रास न किसी को, शस्त्र शांति औ’क्षमा लिया |
ध्रुव अघनाश्क को रोक-टोक थी न कुछ,
ध्रुव लोक में ही आसन जमा लिया ||

भक्त प्रहलाद की तरह ध्रुव भी ईश्वर के अटल भक्त थे. भगवान का प्रेम और आशीर्वाद पाने के लिए उन्होंने क्या-क्या कष्ट नहीं सहे. अपने लक्ष्य की सघन-साधना से वे संसार में सबसे ऊँचे स्थान पर अर्थात आकाश  मंडल में जा विराजे, इसी प्रकार व्यक्ति यदि हिम्मत न हारकर अपनी कार्य-साधना में लगा रहता है तो वह एक दिन लक्ष्य के शिखर को अवश्य पाकर ही रहता है.

ध्रुव और प्रहलाद का नाम आज संसार में अमर है और आगे भी अमर रहेगा . किसी भी सच्चे लक्ष्य के कार्य- साधना व्यक्ति को सरे जग में अमरता और प्रसिद्धि प्रदान करती है |

Aug 19, 2016

Sri Krishna Bhajan Mera Aapki Kripa Se Sab Kaam Ho Raha Hai

मेरा आपकी कृपा से
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा है।
करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है।।
मेरा आपकी कृपा से...

पतवार के बिना ही, मेरी नाव चल रही है,
हैरान है जमाना, मंजिल भी मिल रही है।
करता नहीं हूँ कुछ भी, सब काम हो रहा है।।
मेरा आपकी कृपा से...

तुम साथ हो जो मेरे, किस बात की कमी है,
किसी और वक्त की अब, दरकार ही नहीं है।
तेरे साथ से गुलाम अब, गुल्फाम हो रहा है।।
मेरा आपकी कृपा से...

मैं तो नहीं हूँ काबिल, तेरा प्यार कैसे  पाऊँ,
टूटी हुई वाणी से, गुणगान कैसे गाऊँ।
तुम्हरी ही प्रेरणा से, ये कमाल हो रहा है।।
मेरा आपकी कृपा से...




Sri Krishna Bhajan Mera Aapaki Kripa Se

mera aapakee kripa se, sab kaam ho raha hai.
karate ho tum kanhaiya, mera naam ho raha hai ..
mera aapakee kripa se ...

patavaar ke bina hee, meri naav chal rahee hai,
hairaan hai jamaana, manjil bhee mil rahee hai.
karata nahin hoon kuchh bhee, sab kaam ho raha hai ..
mera aapakee kripa se ...

tum saath ho jo mere, kis baat kee kamee hai,
kisi aur vakt kee ab, darakaar hee nahin hai.
tere saath se gulaam ab, gulphaam ho raha hai ..
mera aapakee kripa se ...

main to nahin hoon kaabil, tera pyaar kaise paoon,
tootee huee vaanee se, gunagaan kaise gaoon.
tumharee hee prerana se, ye kamaal ho raha hai ..
mera aapakee kripa se ...

Listen to this song on youtube.

Aug 5, 2016

देशाटन से लाभ


जीवन की वास्तविकता गतिशीलता में निहित है. मनुष्य को अपने जीवन में विकास करने के लिये उसका जीवन उन्मुक्त, स्वच्छंद और बन्धन हीन होना बहुत जरुरी है. उसके मन में नवीन वस्तुओं, दृश्यों और स्थानों के प्रति कौतुहल और जिज्ञासा होनी चाहिए. यही मनोवृत्ति देशाटन करने को प्रेरित करता है.



Deshatan Se Labh Hindi Essay
देशाटन या यात्रा का अर्थ है नए स्थानों, नए नगरों, नयी संस्कृतियों, नयी वेशभूषा, नए रीति रिवाज, प्राकृतिक सौन्दर्य और विविध प्रकार के जीव -जंतुओं  को निकट से देखने, उनकी निकटता का आनंद लेने और ज्ञान वृद्धि. यात्रा करने से मन की संकुचित भावना मिट जाती है. मस्तिष्क को चिंतनशील और क्रियाशील बनाने के लिये यात्रा करना बहुत जरुरी होता है. यात्रा करने से चूँकि वातावरण परिवर्तन हो जाता है, इसलिए मनुष्य के मन और मस्तिष्क में नवीनता आ जाती है. 

यात्रा के पूर्व की तैयारी कैसे करें :  यात्रा पर जाने से पहले कुछ तैयारी कर लेना बहुत जरुरी होता है. मेरा तो मानना है कि सबसे पहले आप जहाँ जा रहे हैं वहां जाने का ट्रेन टिकट या वायुयान का टिकट  का पता कर लें. यदि आपकी यात्रा देश के अन्दर ही करनी है तो आप घरेलू  एयरलाइन से टिकट  का ticket खरीद लें. यदि आप देश से बाहर जाने की सोच रहे हैं तो आपको अन्तराष्ट्रीय एयरलाइन  का ticket लेना पड़ेगा. हमें यदि गंतव्य तक जाने के लिये कोई सहयात्री मिल जाए जो जहाँ हम जा रहे हैं वहां की भाषा से पूर्ण परिचित हो, उसे वहां का रीति-रिवाज अच्छे से पता हो, वहां के ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थलों का भी ज्ञान हो. जिस स्थान की यात्रा की जानी है, वहां की जलवायु के बारे में पूरी जानकारी लेनी चाहिए और उसी के अनुसार वस्त्र इत्यादि का भी प्रबंध करके जाना चाहिए.

यात्रा ज्ञान का स्रोत : आत्मनिर्भर बनने के लिये यात्रा का बहुत महत्व है. इससे मनुष्य शिक्षा संबंधी ज्ञान प्राप्त करता है. जिन ऐतिहासिक और धार्मिक स्थानों का अध्ययन  केवल पाठ्यपुस्तक में ही किया जाता है, उसका ज्ञान क्षीण होता है. यदि हम उन स्थानों को प्रत्यक्ष देख लेते हैं तो हमारा ज्ञान और भी दृढ हो जाता है. हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, और सारनाथ के भग्नावशेष, अजंता और एलोरा की गुफाएं, बोधगया का मंदिर, आगरे का ताजमहल, दिल्ली का लालकिला आदि का साक्षात दर्शन यात्रा द्वारा ही संभव है. यात्रा करने से अन्य देशों को शासन प्रणाली और सभ्यता का पता चलता है. प्राचीन काल में मेगास्थनीज, फाहियान और ह्वेनसांग जैसे  विदेशी यात्री हमारे देश की यात्रा पर आये. उनकी यात्रा वृत्तांत से हमें काफी कुछ जानकारी मिलती है. कहा गया है कि सर्वश्रेष्ठ शिक्षा अनुभवों से प्राप्त होती है और ये अनुभव हमें यात्रा से प्राप्त होती है.


सचमुच यात्रा या देशाटन से हमारा न केवल मनोरंजन होता है बल्कि हमारा ज्ञान भी समृद्ध होता है और हमारी सोच को व्यापकता मिलती है.


Jul 31, 2016

बिहार की लोक संस्कृति का जीवंत चित्र है फिल्म जट जटिन



सबसे पहले मैं उस व्यक्ति को धन्यवाद देना चाहूँगा जिन्होंने फिल्म जट जटिन  को YouTube पर अपलोड किया जिसकी वजह इसे देख पाना मेरे लिये संभव हुआ. 

कहा गया है कि सिनेमा समाज का आईना होता है. संस्कृति का वाहक होता है और मुख्य कहानी के साथ ही साथ कई छोटी- छोटी घटनाओं का एक क्रमिक विन्यास होता है. हिंदी फीचर फिल्म जट जटिन के संदर्भ में ये बातें बिलकुल सटीक बैठती हैं.  जट जटिन फिल्म की शुरुआत बाहर से एक रिसर्च स्कॉलर के गोदरगावा पुस्तकालय पर आगमन से होता है. जो जन मानस में बसे जट जटिन की लोक कथा के अध्ययन और अन्वेषण के लिये वहां पधारते हैं. वहीँ से जट जटिन फिल्म की शुरुआत होती है. इस फिल्म के निर्माता और लेखक श्री अनिल पतंग जी ने बिहार की लोक संस्कृति में रची- बसी इस लोक नाटिका को फिर से जीवित कर दिया है. शादी के विधि विधान, महिलाओं द्वारा शादी के गीत, आदि का सुन्दर चित्रण किया है. जब बच्चों का जन्म होता है तो बख्खो बखोनी बधाइयाँ देने आते हैं, नाचते गाते हैं और उपहार ले जाते हैं. लगभग हर गाँव में ग्राम देवता की पूजा होती है. ब्रह्म बाबा स्थान एक अति पवित्र स्थान होता है, जिसका कई बार जिक्र आया है इस फिल्म में. जब नायिका के बच्चे को सांप काट लेता है तो उसे भगत जी के पास ले जाया जाता है और भगतई का बहुत बखूबी चित्रण किया गया है. इस फिल्म के द्वारा स्त्री शिक्षा के महत्व को बताया गया है. इसमें दिखाया गया है कि किस प्रकार नायिका पढने स्कूल जाती है और शिक्षा ग्रहण करती है.




इस फिल्म के द्वारा गरीबी, चिकित्सा का अभाव, सामजिक अन्धविश्वास जैसे डायन, पोंगा पंथीपना,  आदि अनेक विषयों को कुशलतापूर्वक दिखाया गया है. समाज का अमीर और दबंग व्यक्ति और उसके परिवार के लोग किस तरह से लोगों के साथ अनाचार और गलत व्यवहार करते हैं, वह स्पष्ट देखा जा सकता है.

इस फिल्म के द्वारा यह भी दिखाया गया है कि कृषि और पशुपालन आधारित सामाजिक व्यवस्था लोगों के जीवन दशा को सुधारने में अक्षम है और इसलिए फिल्म का नायक अपने बच्चे की अच्छी परवरिश के लिये होरी के गोबर की तरह  पलायन कर मोरंग जाता है. यह एक सामाजिक कटु सत्य है कि कृषक परिवार के बच्चे आज भी पलायन कर रहे हैं. 
अब बात करते हैं कलाकरों की. इस फिल्म में अभिनेत्री अमर ज्योति ने बहुत ही दमदार अभिनय और नृत्य किया है. उनके अभिनय की जितनी तारीफ़ की जाय कम ही होगा. नायक राजीव दिनकर का अभिनय भी बढ़िया है. सरपंच का भतीजा चमरू इस फिल्म का मुख्य विलेन है. विलेन के साथ ही साथ वह एक नंबर का लफुआ और बदतमीज है. इस रोल को अमिय कश्यप ने बखूबी निभाया है. 

अब करते हैं इस फिल्म के संगीत की बात. इस फिल्म में कुल 16 गाने हैं. इसमें कुछ गाने तो बिहार की माटी की बोल हैं. जैसे – भैया मलहवा हो नैया लगा दे नदिया के पार (LINK), टिकवा जब जब..., धानमा कुटत जट्टा..., आदि अनेक लोकप्रिय गीत हैं. लेकिन गानों की अधिकता फिल्म को कहीं कहीं बोझिल बना देता है.

इस फिल्म की ज्यादतर शूटिंग मिथिलांचल क्षेत्र में ही हुई है जिससे इसकी मौलिकता स्पष्ट दीखती है. इस फिल्म में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी गयी है जो बहुत ही सराहनीय प्रयास है.  

फिल्म के संवाद में हिंदी के साथ ही साथ स्थानीय शब्दों को शामिल किया गया है जो इसे प्रमाणिक और असरदार बनाता है. कहीं-कहीं फिल्म थोड़ी धीमी हो जाती है. छायांकन और लाइट्स के प्रभाव को और बेहतर बनाया जा सकता था. 

इस फीचर फिल्म को न्यूयॉर्क इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ढाई लाख डॉलर से कम लागत से निर्मित फिल्मों की श्रेणी में मेरिट अवार्ड से सम्मनित किया गया. यह एकमात्र हिंदी फिल्म है जिसे यह गौरव प्राप्त हुआ है. इसके साथ ही साथ इस हिंदी फीचर फिल्म को कई अन्य पुरस्करों से नवाजा गया है.

कुल मिलाकर इस फिल्म के निर्माता निर्देशक बधाई के पात्र हैं एक अच्छी और प्रभाव शाली फिल्म बनाने के लये. बिहार के सांस्कृतिक चेतना को जगाने में यह फिल्म एक महती भूमिका अदा करेगी ऐसा विश्वास है. जट जटिन मात्र एक हिंदी फीचर फिल्म ही नहीं बल्कि बिहार के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का प्रतिबिम्ब है. कुल मिलाकर यह एक बहुत ही शानदार फीचर फिल्म है. 

This post is written by  guest blogger Pankaj Kumar.  Read more most written by Pankaj Kumar on www.behtarlife.com


Jul 29, 2016

समय पर टैक्स जमा करें और जिम्मेदार नागरिक बनें

इतिहास गवाह है कि प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक, मौर्य काल से लेकर मुग़ल काल तक और आज भी, यानि आधुनिक काल में भी लोगों ने राजा को, सामन्त को, जमींदार को, सरकार को,  टैक्स यानि कर चुकाए हैं. 

लगान, राजस्व, कर, जजिया कर, शिक्षा कर आदि आदि इसे कई नामों से जाना जाता है. अब सवाल उठता है कि यह टैक्स क्यों वसूला जाता है?आज के सन्दर्भ में सीधा जबाब है देश के चहुमुखी विकास के लिये. आप राजमार्ग से जाते हैं, स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल, मुफ्त दवाइयां, किसानों को सब्सिडी यह सब कहाँ से आता है. लोगों द्वारा दिए गए टैक्स से ही तो ये सारे लोक कल्याणकारी योजनायें चलाई जाती है. 




जिस देश में जितने लोग टैक्स देते हैं वह देश उतना धनी, संपन्न, विकसित माना जाता है. प्रत्येक देश की सरकारें कुछ मानक तय करती है कि यदि एक व्यक्ति एक निश्चित सीमा से ज्यादा कमाता है तो वह  उस कमाई से कुछ रकम सरकार को टैक्स के रूप में देगा. इसके लिये पूरा इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ही बना हुआ है. 

यदि एक व्यक्ति सही रूप से और समय पर अपना टैक्स जमा करता है तो इसके बहुत सारे फायदे भी हैं. जैसे यदि वह व्यक्ति होम लोन के लिये आवेदन देता है तो सबसे पहले उसका इनकम टैक्स रिटर्न की कॉपी माँगी जाती है. यदि आप विदेश यात्रा पर जाते हैं तो आपसे इनकम टैक्स रिटर्न माँगा जाता है. अतः इनकम टैक्स रिटर्न एक प्रमुख वित्तीय दस्तावेज होता है. 

एक आदर्श नागरिक अपने देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भली भांति निर्वाह करता है. वह समय पर इनकम टैक्स भरकर देश की भलाई के बारे में सोचता है. अपनी आय को सरकार से छुपाना अपराध है. 
किसी भी देश के विकास को गति देने के लिये धन की बहुत जरुरत होती है. सरकार नयी- नयी योजनायें किस आधार पर शुरू करती है - टैक्स के बल पर. यदि किसी देश में इनकम टैक्स देनेवालों की संख्या में प्रतिवर्ष बढ़ोतरी हो रही है इसका मतलब है वह देश विकास कर रहा है. तो आइये हमसब  यह शपथ लेते हैं कि हम अपना इनकम टैक्स समय पर और सही सही जमा करेंगे और अपने देश को विकास की नयी ऊँचाइयों पर ले जायेंगे.    

I’m taking the #TaxPledge to file IT returns with the easy Income Tax efiling option from H&R Block at BlogAdda.

Benefits of Filing Income Tax Return


Do you know how does the Government start any developmental work in an area? Government collects its revenue in the form of taxes. 

What will happen if citizens of any country do not pay tax on time? It is clear that government will not be able to have adequate amount of revenue, thus it will hamper the growth of the country. With the development of civilization, a system of collecting taxes has developed. Now every year that is, in a financial year, the people who have earned money and if their income come in tax slot, they pay tax themselves. 

Paying tax on time and with honesty is the responsibility of a citizen. There is a proper system for collecting tax. If you are a government employee or working in private sector or a professional, if your earnings lie in tax slot, you have to pay tax. 

Tax is a major source of revenue for government. When you see the government budget, you can notice that tax part is the main source of income. Government of India encourages people to disclose their unaccounted money and pay tax; the rest money will be white, if you pay tax for that accounted amount.




On the other hand there are many benefits of paying tax. It will improve your CIBIL Score, thus you can take loan easily. If you want to take home loan, the bank will ask you for Income tax returns. If you want to go abroad, you have to show your IT returns.

It is duty of every citizen to be a part of nation’s growth. If you pay your income tax you can sleep well, otherwise ask those people who have got notice from income tax department. So be a responsible citizen of India and pay tax on time. 

Let us be the part of nation building. If citizens of India will pay tax on time , no one can stop the growth of our country. 

I’m taking the #TaxPledge to file IT returns with the easy Income Tax efiling option from H&R Block at BlogAdda.

Jul 24, 2016

Colgate Magical Story with Sea World Creatures


To enhance the knowledge and creativity of a child, this time Colgate has designed four different packs having a story line in them. These packs have many sea world creatures and other famous characters. The objective of this activity is to make the children imagine a story in a new way. On the other hand, they are able to know about many trivia and tidbits about sea creatures. 

When I receive these four packs, my daughter seems very happy. She started observing all the characters printed inside the packs. I told her to cut all the characters and try to weave a story.

She was very enthusiastic to do this project. She took it as a new task. She cut all the characters and wrote all the information on a sheet of paper. It was very informative because around 15 sea creatures have been mentioned in all the four packs. Collectively it is like a sea world picture book for a child. 

My daughter weaved a Colgate magical story, which I would like to mention here.


Blackbeard, with his assistant Sadie, was always in search of treasure hidden under the sea. He was very experienced sailor and navigator. He had many magical powers. He had a sword with magical powers. He could fight with any dangerous animals with the help of his sword.  Sadie, on the other hand, was very clever and could understand many languages and had great knowledge and behavior of sea world animals.
They had a parrot which could imitate human voice. They were on sail to search the treasure in the Indian Ocean.  


They found the colourful Coral reefs in their sea route. Sadie was noting down the details of animals and sea world creatures around the Coral Reefs. They saw many dolphins during their navigation. Some were small and some were big. Dolphin is a very cool animal.  They saw sting ray, killer whale, Barracuda, Sea horse, Sea turtle, Lion fish and many other sea animals during their hunt of the treasure. Sadie was using many devices to find out the location of castle. They had to find the castle so that they could get the treasure map. 


With the help of modern gadgets, Sadie helped the Blackbeard to find the exact location of the castle. Now Blackbeard prepared himself to get down under the sea water.

When he dived into sea water, it was very pleasant environment inside. The sea water was like blue world all around. The Blackbeard chanted some magical words. He saw a mermaid in front of him showing him the way to castle.  He saw sharks and crabs roaming around but he was fearless as he was having the magical sword. After searching here and there, he was able to find the treasure map. Now the final journey started. He had to find the treasure


After swimming around half an hour, he saw a shipwreck. There he saw sea animals like star fish, puffer fish, etc. As he was nearing the treasure, he was attacked by a sword fish. Sword fish attacked his left hand. But the Blackbeard was a brave man. In the reply, he attacked the sword fish, and finished it in single blow.

When the octopus saw the fight between the Blackbeard and Sword fish, it became afraid and fled away. Thus the Blackbeard got the treasure easily. 

If you want more information about Colgate Magical Story, please visit  http://www.colgate.co.in/en/in/oc

Jul 10, 2016

How important is it for children to catch up on lost growth


It is the wish of every parent that his child should have proper physical and mental health. Some children attain their physical development, i.e. height and weight, according to their age, while some children lag behind. Now the question arises whether these children will be able to catch up their lost growth perfectly and on time.  Every parent should know the reason of this delayed growth. What are the reasons of this lost growth? And what is the importance of catch up on lost growth?





A child’s overall development is of prime importance. Today's children are tomorrow's future. They have to take the responsibility of the society and the nation on their shoulders. So, it is very important for them to have proper and all-round growth in their early years.

An infant starts to develop in the womb of the mother since inception. That is why, pregnant women are advised to eat balanced diet. After his birth, an infant’s growth is very important up to two years. This is the time when children grow more.

If a child fails to develop properly in the first three years, then his or her lost growth can be caught up in the coming years. You must have seen some children who are less tall than their peers or their friends, some of them have even low level of intelligence.

The question arises here what is the reason of this poor or delayed growth? There are many causes of this lost growth? According to research done on this topic, the biggest cause is malnutrition. Malnutrition in itself is a very big topic. Malnutrition or under-nutrition is a major challenge among most of the third world countries.  Other causes include genetic cause, metabolism related problems or other local causes.

As far as malnutrition is concerned, the children do not get balanced diet having all the essential ingredients which is necessary for overall development of the body.

Today medical science has made so much progress that we can catch up on the lost growth of a child.

Recently Horlicks has launched a fantastic product to cater the needs of proper development of three to nine years children. It is - Horlicks Growth Plus. It has been prepared by International pediatric experts. If you feel that your child's physical development is not up to the mark, you should consult a qualified doctor and use Horlicks Growth Plus as food supplement. It contains whey protein and many other nutrients to accelerate the lost growth of the children. Use this product for at least six months and notice growth. This product is clinically proven.

For further information about Horlicks Growth Plus please visit this website:  https://growthplus.horlicks.in/

Finally we can say that children are the darlings of their parents, they are the assets of society; and the future generation of the country. Hence, their proper development is significantly important.


Read the same post in Hindi:

हर माँ बाप की यह इच्छा होती है कि उनका बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हो. कुछ बच्चों का शारीरिक विकास यानि लम्बाई और वजन, उनकी उम्र के अनुसार होता है जबकि कुछ बच्चे इसमें पीछे रह जाते हैं. अब सवाल यह उठता है कि क्या ये बच्चे आगे चलकर विकास की पूर्णता को प्राप्त कर सकेंगे या नहीं. हर माता पिता का यह जानना जरुरी हो जाता है कि उनका यह growth lost क्यों हुआ. इसके क्या कारण हो सकते हैं? और इसका क्या महत्व है?

किसी भी बच्चे के संपूर्ण विकास का अलग ही महत्व होता है. आज के बच्चे कल की भावी पीढ़ी होंगे. उनके कंधों पर देश और समाज की जिम्मेदारी आनेवाली है, इसलिए यह अति महत्वपूर्ण हो जाता है कि उनका सर्वांगीण विकास हो. 

माँ के गर्भ में आते ही बच्चों का विकास शुरू हो जाता है. इसलिए तो गर्भवती महिलाओं को संतुलित भोजन करने की सलाह दी जाती है. जन्म लेने के बाद नवजात शिशु का दो वर्ष का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है. बच्चों का ज्यादातर विकास इसी दौरान होता है.

यदि कोई बच्चा पहले तीन साल तक सही तरह से विकास नहीं कर पाता है, तो क्या अगले आने वाले वर्षों में उसके खोये या रुग्ण विकास को पुनः प्राप्त किया जा सकता है. आपने कुछ बच्चों को देखा होगा जिनकी लम्बाई अपने हमउम्र दोस्तों की अपेक्षा कम होती है या उनकी बौद्धिकता का स्तर उनसे थोडा कम होता है. 

अब सवाल यह उठता है कि क्या इस रुग्ण या कमतर विकास की क्या वजह है? इसके कई वजह हो सकते हैं? शोधों से आये परिणामों के मुताबिक कुपोषण इसका सबसे बड़ा कारण है. कुपोषण अपने आप में एक बहुत बड़ा विषय है. तीसरी दुनिया के  ज्यादातर देशों में कुपोषण या अल्प पोषण की समस्या है. अन्य कारणों में अनुवांशिक कारण, मेटाबोलिज्म से जुड़े कारण या अन्य स्थानीय कारण हो सकते हैं. 

जहाँ तक बात कुपोषण की है, बच्चों को संतुलित आहार नहीं मिल पाता है जिसमें शरीर के पूर्ण विकास हेतु सारे अवयव मौजूद हों. 
लेकिन आज मेडिकल साइंस इतना तरक्की कर चुका है कि बच्चों के इस खो चुके विकास को पुनः पाया जा सकता है.

अभी अभी हॉर्लिक्स ने तीन से नौ साल के बच्चों के उचित विकास के लिये शानदार उत्पाद बाजार में उतारा है. जी हाँ – Horlicks Growth Plus. इसका निर्माण अन्तराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त शिशु विशेषज्ञों द्वारा किया गया है. यदि आपको लगता है कि आपके बच्चे का  शारीरिक विकास जितना होना चाहिए था उतना नहीं हो रहा है तो आप किसी कुशल चिकित्सक की सलाह लें और Horlicks Growth Plus food supplement दें. इसमें whey protein और अन्य कई पोषक तत्व होते हैं जो बच्चे के रुके हुए या कम हो रहे विकास की गति को तेज कर उनके विकास को सामान्य बच्चों सा बना देते हैं. इसे कम से कम छह महीने तक देना चाहिए. तभी इसका सही असर होगा और उचित लाभ मिलेगा.  इस  उत्पाद को clinically prove करने के बाद बाजार में उतारा गया है. 

Horlicks Growth Plus के विषय में अधिक जानकारी के लिये यह वेबसाइट देखें:  https://growthplus.horlicks.in/

कुल मिलाकर बच्चे अपने माँ बाप के आँखों का तारा होते हैं, उनके लिये सारा सुख और सौरभ होते हैं, भावी जीवन में राष्ट्र के गौरव होते हैं. इसलिय उनका समुचित विकास बहुत आवश्यक होता है. 

Jul 2, 2016

बच्चों पर टीवी कल्चर का दुष्प्रभाव


आज के युग को टीवी युग कहा जा सकता है. टीवी ने अपनी पहुँच लगभग हर घर में बना ली है. बच्चा जब इसी कल्चर में पल और बढ़ रहा है, तो उसका असर बालमन पर पड़ना लाजिमी है, टीवी पर दिखाई गयी हिंसा उसे जीवन का सहज अंग सा प्रतीत होने लगती है. यह अनैतिक मूल्यों के साथ हिंसा के प्रभावों को भी ग्रहण करता चलता है.


पहले बच्चों का टीवी के आगे इतना ज्यादा exposure नहीं होता था. उस समय केवल, video games और multiplexes नहीं थे.फिल्मों में इतनी सेक्स और हिंसा नहीं होते थे. सामजिक बनावट और चलन के हिसाब को बच्चों को इन चीजों से दूर रखा जाता था, लेकिन आज स्थिति बिलकुल अलग है. आज किसी भी घर में प्रवेश कीजिये सामने एक बड़ा सा टीवी दिख जाएगा. बहुधा चलता हुआ टीवी और सोफे या कुर्सी में हाथ में रिमोट पकडे एक बच्चा. घर का पूरा माहौल टीवी के प्रभाव में जान पड़ता है. टीवी पर दिखाए गए हिंसापूर्ण और तथाकथित मनोरंजक कार्यक्रमों के दूरगामी परिणाम होते हैं.

वास्तव में ये बच्चों की पूरी सोच पर हावी हो जाते हैं. चूँकि यहाँ अपराध को प्रायः ग्लेमराइज किया जाता है, उसकी आलोचना नहीं की जाती इसलिए बच्चों का भोला मन उसे बुरा नहीं समझ पाता. घर परिवार में अभिभावक के पास इतना वक़्त नहीं होता कि बच्चों को इसके बारे में बता सकें. बच्चे यह मान  लेते हैं कि टीवी पर दिखाई  जा रही हिंसा हमारे दैनिक जीवन के अंग हैं तो यह उचित ही होगा. इस प्रकार बालक अपना गुरु स्वयं है या फिर टीवी.

ध्यातव्य है कि इस हिंसा का प्रभाव सिर्फ बालक पर ही नहीं लड़कियों पर भी पड़ता है. टीवी लड़कियों में बहादुरी पूर्ण काम करने की प्रेरणा देना चाहता है. कुछ हद तक यह बच्चों को कानून अपने हाथ में लेने को प्रेरित करता है. चलती बस में किसी को पीट देना. मार पीट या लड़ाई कब करनी चाहिए और कब नहीं इसक सही सही निर्णय लेने की परिपक्वता बच्चों में नहीं होती, इस प्रकार टीवी बच्चों को इस तरफ ले जाती है.

अब यहाँ जिम्मेदारी सरकार और परिवार की बनती है कि बच्चों  के आगे परोसे जानेवाले टीवी कार्यक्रम को कैसे परखा जाए ताकि बच्चों को हिंसात्मक और अनैतिक प्रोग्राम देखने से रोका जा सके.सरकारों को विश्व स्तर पर कानून बनाकर इसपर नियंत्रण रखना चाहिए. बच्चों को सिर्फ उसी तरह के कार्यक्रम देखने दिया जाय जिससे उनका सकारात्मक मानसिक और शारीरिक विकास संभव हो सके. टीवी पर इस तरह के कार्यक्रम बनानेवालों को थोड़ी परेशानी आयेगी लेकिन समग्र रूप से बच्चों का बहुत भला हो जायेगा.

Jun 23, 2016

Yatra for knowledge and Entertainment

I would like to share my journey to Agra. As you all know, Agra is famous for one of the seven wonders of world – The Taj Mahal. When the word Taj Mahal comes in mind, it reminds us the love of the Mughal Emperor Shah Jahan and his beloved queen Mumtaz Begum.

Preparation for the journey

When it was finalized that we are going to visit the Taj Mahal, I started to read the travel blogs and wrote some useful tips which I thought were relevant for this journey.  My husband booked the railway ticket from Patna to Delhi.  One can opt for Domestic Airlines from Patna to Delhi. But we opted train for this journey to see the country side.  After staying two days in Delhi, we had to go to visit the Taj Mahal. 

On proposed day we took our train from Patna to Delhi. This journey was pleasant.  After resting for two days in Delhi, we took our train to Agra, i.e. Taj Express from Hazrat Nizamuddin Station. It takes around 4 hours to reach Agra. 

We were four people - me, my husband and two kids.  When we reached Agra station, we saw many taxi drivers and agents were asking for a cab.  We met a person who was very nice in his talks. I booked his cab for our journey. His name was Anwar. He was not only a cab driver for me but also our guide for the whole journey. 
He suggested us to first visit Fatehpur Sikri. It is around 40 km away from Agra City. We reached there by 12 o’clock. It the midway, we had our lunch. 



In Fatehpur Sikri, there are many monuments to visit. Buland Darwaza, Dargah of Saint Nizamuddin Aulia, Panch Mahal, Palaces of Jodhabai and other begums, etc. 


We came back to Agra around 5 o’clock in the evening, so we checked in a hotel near to the Taj Mahal.
On next day we went to see the world famous monument – The Taj Mahal. When we entered the campus of the Taj, we were surprised to see the huge entrance gates. 

Wah Taj Wah!

Oh My God! What a beautiful monument! We were mesmerized when we saw the Taj Mahal first time. Really its wonderful. 
No one can believe that it is a 450 years old structure.  When we entered the main building of this monument, it was a onetime experience. Now I could understand why people around the world, wish to come and visit the Taj at least once in his life.  They took International Flights from around the world and came India to see this tomb of love.


The four minarets look alike from any side, either from main gate side or from Yamuna river side. We were fortunate that the main tombs of the emperor and empress were opened. The designs and carvings on white marbles indicate the emperor's love for nature, flowers and arts.  Its campus is about 42 acres in area.  It is said that the best quality stones and marbles had been used to build this tomb.

The white marble dome that surmounts the tomb looks great. The Taj Mahal  is a UNESCO world heritage site. I would suggest everyone to visit this spectacular monument at least once in life. I can say yatra is a mode of entertainment as well as knowledge. Really, this was my Ideal Yatra.

Jun 2, 2016

Get Ready to GO more with Datsun Redi-Go


यदि हम भारतीय कार बाजार की बात करें तो इसके लोअर मिडिल क्लास को आज हर कंपनी टारगेट कर रही है. यूँ आये दिन कोई न कोई कार लांच होते रहते हैं लेकिन हम इस पोस्ट में एक ऐसे कार के बारे में चर्चा करेंगे जो इन दिनों युवाओं को खास पसंद आ रहा है.



यदि मोटे तौर पर देखा जाय तो एक व्यक्ति यदि कार खरीदने जाता है तो अपनी कार में क्या फीचर चाहता है. सबसे पहले तो उसका कार देखने में आकर्षक और स्टाइलिश हो, उसकी बजट के अनुसार हो और उसकी माइलेज बहुत अच्छी हो. आइये हम इस कसौटी पर Datsun Redi-Go कार को परखते हैं.

DatsunRedi-Go कार compact crossover और  urban hatchback का एक अनोखा फ्यूज़न है. Fun. Freedom. Confidence. The ultimate Urban Cross - Datsun redi-GO - the capability of a crossover with the convenience of a hatchback. इसे आप  "Urban Cross" कार भी कह  सकते हैं. 
इसकी संरचना युकान डिज़ाइन पर आधारित है. इसका instrument panel बहुत ही sporty और stylish है. यदि आप इसे आगे से देखे तो आपको D-Cut ग्रील दीखेगा जो इसकी उच्च गुणवत्ता को दर्शाता है. इसके अन्दर बैठने के बाद इसके high स्टांस का पता चलता है जिससे इसका view area बढ़ जाता है और सफ़र करने में सुकून मिलता है.

भारतीय सड़कों पर गाड़ियों का रोड clearance बहुत मायने रखता है और इस कार का ground clearance 185 mm है जो गाडी से सामने की बाधाओं को लगभग समाप्त कर देता है. 

इसमें दिन में जलनेवाले लैंप लगाये गए हैं जिससे लोगों को यह पता चल जाता है कि कार आ रही है. यह लोगों के सुरक्षा की दृष्टि से एक बहुत ही अनोखा फीचर है.

यदि head लैंप की बात करें तो यह बहुत ही आकर्षक और तकनीकी रूप से advanced है. यह नाटकीय रूप से elongated प्रोजेक्टर की तरह है. यह फीचर Datsun Redi-Go को बाजार में उपलब्ध सारे कारों से अलग और विशिष्ट बनाता है. इसका पीछे लगा लैंप भी बहुत आकर्षक और stylish है. 

अब बात करते हैं गाड़ी के आंतरिक बनावट और विशेषता की. कार के अन्दर पर्याप्त space है. इसके डैशबोर्ड की बनावट आधुनिक और बहुत ही आकर्षक है. सीट बनाने में प्रयुक्त फैब्रिक भी अच्छी क्वालिटी का है. 

ऑडियो सिस्टम में रेडियो, सीडी, MP3 आदि सब लगे हैं यानि आपके गीत-संगीत के लिये भी hi-tech इंतजाम है. खिडकियों में पॉवर विंडोज लगे हैं, जिसे ड्राईवर या सवार अपनी सुविधानुसार आसानी से ऊपर नीचे कर सकते हैं. जब मन में आये, ठंडी हवा के झोंकों का आनंद ले सकते हैं.

Datsun Redi-Go कार में 5 गियर हैं. ड्राईवर कंप्यूटर का स्क्रीन बहुत बड़ा है जिसमें स्पीडोमीटर, औडोमीटर, फ्यूल मीटर सब लगा है जो कार के लिये जरुरी सभी parameters को display करता रहता है.

कार में लगा air-conditioner बहुत ही बढ़िया है. इसके कुलिंग points इतने अच्छे है जिससे सीट पर बैठे लोगों को सहज ठंडक मिलता रहे.
सबसे बड़ी बात गाड़ी की माइलेज, जो कम्पनी 25.17 km प्रति लीटर दावा करती है जो एक 799 cc इंजन द्वारा दिया गया बढ़िया fuel efficiency कहा जायेगा. इसके अलावे भी Datsun Redi-Go car में कई अन्य महत्वपूर्ण फीचर हैं. 

इस कार को विशेष रूप से भारतीय बाजार और ग्राहकों के लिये बनाया गया है. भारत जैसे विकासशील देश में जहाँ लोग छोटी और फैमिली कार खरीदना पसंद करते हैं ताकि वे अपने ऑफिस के साथ ही साथ आसपास घूमने फिरने भी जा सकें या इसको यात्री कार के रूप में कर सकें, उनके लिये एक बेहतर विकल्प है. 


Mar 16, 2016

The Colour Festival Holi रंगों का त्योहार होली

होली एक बहुत ही पावन और सरस पर्व है. क्या बच्चे, क्या बूढ़े, क्या नर, क्या नारी, होली में सभी मस्त रहते हैं. होली सिर्फ रंगों का पर्व ही नहीं, भक्ति का पर्व भी है. होली हर वर्ष आती है और हमें यह बताकर चली जाती है कि हरि भजन या ईश्वर की आराधना में क्या शक्ति होती है.

आप सभी प्रह्लाद की कथा से वाकिफ होंगे कि किस प्रकार प्रह्लाद को मारने के उपाय किये गए, लेकिन ईश्वर की कृपा से उसे कुछ भी नहीं हुआ और वह हर बार बचता चला गया. अंत में उसके पिता का वध करने के लिये भगवान विष्णु को नरसिंहावतार लेना पड़ा.

बुरा न मानो होली है 

यूँ तो होली हर उम्र के लोग आनंदपूर्वक खेलते हैं, लेकिन बचपन की होली सबसे बेहतरीन होती है. होली फाल्गुन महीने के पूर्णिमा को मनाया जाता है. लेकिन उसके एक दिन पहले छोटी होली मनाई जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहा जाता है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य भागों में इसे गोवर्धन पूजा के रूप में भी मनाया जाता है, क्योकि उसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल के लोगों को देवराज इंद्र के प्रकोप से बचाया था.

हमलोग बचपन में होलिका दहन के दिन शाम को इस इंतज़ार में रहते थे कि माँ के हाथों से कचौरी-फुलौरी, दहिवाडा आदि बनाया जाता था और हमलोग मजे लेकर खाते थे. होली वाले दिन सुबह उठते ही शरीर में नयी उर्जा का संचार होने लगता था. आज तो बहुत मजा आएगा. सुबह धुप निकालते ही अपने दोस्तों  के साथ खेलने चले जाते. पानी का बौछार शुरू हो जाता. हम होली खेलने के लिये टीम बनाकर चलते और आते जाते लोगों पर पानी और रंगों का बौछार कर देते थे. यह सब क्रम 10-11 बाजे तक चलता, फिर माँ का बुलावा आ जाता,

 हम लोग घर आकर नहा धोकर तैयार हो जाते. माँ के हाथों से बना गुजिया, पुआ, पकवान आदि खूब मजे ले लेकर खाते. हमारा इंतजार रहता कि कब दो बजे और फिर गुलाल वाली होली शुरू करें. हमें नए कपडे मिलते बिलकुल सफ़ेद. कुरते की जेब में गुलाल रखकर निकला पड़ते होली खेलने – रंग बिरंगे गुलाल वाली होली, असली होली. बहुत मजा आता था. हमारे घर में एक बाल्टी में रंग रखा जाता था और उसमें एक पिचकारी. हम आते जाते लोगों के कपडे को रंगीन बना देते थे. यदि निशाना चुक जाता तो जल्दी जल्दी पिचकारी में रंग भर दुबारा रंग फेंकते, लेकिन रंग डालकर ही छोड़ते थे.

:

कभी कभी माँ कहती हाथ मुँह और पैर में पेराशूट नारियल तेल लगाकर बाहर जाओ, इससे रंग त्वचा को नहीं पकड़ेगा. वाकई यह बहुत ही कारगर फार्मूला था.

आह! कितना मजेदार था बचपन की होली! उन्मुक्त, निर्द्वंद, स्वछन्द!


“I’m pledging to #KhulKeKheloHoli this year by sharing my Holi memories atBlogAdda in association with Parachute Advansed.”

Mar 2, 2016

Dularpur Won Final Match


दुलारपुर बना विजेता

 


बेगूसराय : आरबीएस कॉलेज तेयाय के प्रांगण में शहीद रामविलास ¨सह स्मृति जिला स्तरीय वॉलीबॉल टूर्नामेंट का फाइनल मैच दुलारपुर व टीसीएम मधुरापुर के बीच खेला गया। इसमें दुलारपुर की टीम ने टीसीएम को 3-1 से हराकर विजेता का खिताब जीता।मौके पर डा. रंजन कुमार चौधरी ने विजेता एवं उपविजेता टीम को शील्ड प्रदान किया। खेल से युवाओं का सर्वांगीण विकास होता है। मौके पर रेफरी अजय कुमार, दिलीप कुमार, रामानुज चौधरी, विजयशंकर चौधरी, राजेश चौधरी, गो¨वद पाठक, राजीव चौधरी आदि मौजूद थे। स्वागत भाषण भोला चौधरी ने दिया।
Acknowledgement: Dainik Jagran

Feb 14, 2016

Traditional Music of Rural India Hindi Essay

ग्रामीण भारत का पारंपरिक संगीत हिंदी आलेख


ग्रामीण भारत के पारंपरिक संगीत पर लिखने से पहले इसके बारे में यह जान लेना बहुत जरुरी है कि इसके कई स्तर हैं, कई रूप हैं और कई प्रकार हैं. सबसे पहले पारम्परिक संगीत हर ऋतू और हर पर्व त्यौहार से जुड़ा होता है. हम जनवरी महीने से शुरू करें तो सबसे पहले 26 जनवरी आता है, इस मौके पर तो ज्यादातर फ़िल्मी देशभक्ति गीत स्कूल के बच्चे गाते हैं लेकिन कुछ पारंपरिक संगीत भी हैं जो देशभक्ति से जुड़े होते हैं.
वसंत पंचमी में सरस्वती माता के बहुत सारे लोक भजन गाये जाते हैं. एक सबसे बड़ा बदलाव आया है वह यह है कि हर दो चार गाँव पर एक कीर्तन मण्डली होती है जो विभिन्न आयोजनों पर अपनी प्रस्तुति देते हैं. कुछ मूल भजन के साथ ही साथ ये मण्डली कुछ पैरोडी भी तैयार करते हैं जो तत्कालीन लोकप्रिय फ़िल्मी गीत पर आधारित होता है. यह सुनने में बहुत ही लोकप्रिय होता है और युवा वर्ग इसे विशेष रूप से पसंद करते हैं.  
वसंतपंचमी के बाद होली गायन शुरू हो जाता है. होली का पर्व एक सरस पर्व हैं. होली से सम्बंधित एक से बढ़कर एक लोकसंगीत जनमानस में रचे बसे हैं. जोगीरा, फाग, धमाल, चौताला, भजन, ठुमरी आदि अनेक तरह के संगीत होली के अवसर पर गाये जाते हैं. ग्रामीण स्तर की कीर्तन मण्डली में अगर वाद्य यंत्र को देखा जाय तो आपको प्रायः एक हारमोनियम, ढोलक (कभी कभी तबला), झाल, मंजीरा (दो से तीन जोड़ी) ही होती हैं. यह कीर्तन मण्डली जब आपस में संगत करती हैं तो गाँव के बूढ़े या बुजुर्ग शामिल होते हैं और वहीँ उन पारंपरिक गीतों या धुनों को गाते बजाते हैं जो मौखिक रूप से कई पीढ़ियों से चला आ रहा है

कभी कभी लगता है कि आज के इस तकनीकी युग में इसे रिकॉर्ड कर संरक्षित का लेना चाहिए. दुर्गा पूजा, श्री कृष्णाष्टमी, नवरात्र, छठ, महाशिवरात्रि, सत्यनारायण पूजा, नवाह, अष्टयाम, आदि अनेक भक्तिमयी आयोजन होते हैं जब लोग इक्कठे होकर गीत- संगीत गाते बजाते हैं

शहरों में MUSIC सीखने के सेन्टर होते हैं जहाँ बच्चे जाते हैं और फीस भरकर ये कला सीखते हैं. गाँव में लोग सिर्फ अभ्यास कर निःशुल्क सीख लेते हैं. ग्रामीण परिवेश में मंदिर, शिवाले या सामुदायिक भवन ऐसा स्थान होता है जहाँ भजन कीर्तन का आयोजन होता रहता है.

समाज में कीर्तनकार को विशेष सम्मान प्राप्त होता है लेकिन दुःख की बात यह है कि इनकी संख्या लगातार घटती जा रही है. गाँव से शहर की तरफ लोगों का तेजी से पलायन भी पारंपरिक संगीत के लिए एक बाधा है. पहले संगीत और संगीतकार की बहुत इज्जत होती थी, आज के मोबाइल युग में यह सुलभ साधन बन गया है. लेकिन आज के युवा इसे एक मौका के रूप में देखे और यदि उन्हें कभी कोई भी दुर्लभ या अच्छा पारंपरिक संगीत सुनाई पड़े तो वह उसे रिकॉर्ड कर YOUTUBE पर डाल सकते हैं, ताकि उसे और लोग भी सुन सकें और जान सकें.


This blog post is inspired by the blogging marathon hosted on IndiBlogger for the launch of the #Fantastico Zica from Tata Motors. You can apply for a test drive of the hatchback Zica today.

MGNREGA and Its Impact on Rural Employment

जैसा कि आपको पता है कि MGNREGA को Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act के नाम से जानते हैं. यह भारत सरकार की बहुत ही महत्वाकांक्षी परियोजना रही है.  

Picture Courtesy: The Hindu
जैसा कि हम सबको मालूम है कि महात्मा गांधी ऐसा मानते थे कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आत्मनिर्भरता, स्वशासन की वकालत किया करते थे। गांधीजी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान खादी और चरखे का प्रचलन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता और स्वनिर्भरता को ध्यान में रख कर किया। आज की स्थिति वैश्वीकरण के साथ विकास की है। तीव्र गति से आर्थिक विकास के नए आयामों को गढ़ा जा रहा है। परंतु इस विकास के साथ भारी असमानता भी दिखाई पड़ती है। ग्रामीण-शहरी, अमीरी-गरीबी के बीच का अंतर व्यापक रूप से दिखता है। आज ग्रामीण क्षेत्र विकास की राह पर शहरों जैसा दौड़ पाने में लाचार बने हुए हैं। इस लाचारी को दूर करने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कई अहम पहल की हैं। पीयूआरए, मनरेगा, ग्रामीण विद्युतीकरण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वरोजगार कार्यक्रम, आधारभूत संरचना निर्माण सहित ऐसी कई योजनाएं ग्रामीण विकास व रोजगार वृद्धि हेतु चलाई जा रही हैं। पिछले कुछ वर्षों से इन योजनाओं के लाभकारी प्रभाव स्पष्ट दिखे हैं। ग्रामीण विकास, रोजगार में वृ्द्धि हुई है। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था और ग्रामीणों की स्थिति में भी सुधार आया है। प्रस्तुत पोस्ट में हम मनरेगा के विषय में चर्चा करेंगे:

मनरेगा

विश्व की सबसे बड़ी तथा महत्वाकांक्षी योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना 2006 में आरंभ की गई। लागू होने के 10 वर्ष के भीतर इस योजना ने वास्तव में ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदल डाली है। वर्ष 2010-11 के दौरान इस योजना के तहत 5.49 करोड़ परिवारों को रोजगार मिला है। इस योजना के द्वारा अब तक करीब 1200 करोड़ रोजगार दिवस का कार्य हुआ है। ग्रामीणों के बीच 1,10,000 करोड़ रुपये की मजदूरी वितरित की जा चुकी है। आंकड़ों के मुताबिक प्रति वर्ष औसतन एक-चैथाई परिवारों ने इस योजना से लाभ लिया है। यह योजना सामाजिक समावेशन की दिशा में बेहतर सिद्ध हुई है। मनरेगा के द्वारा कुल कामों के 51 प्रतिशत कामों में अनुसूचित जाति व जनजाति तथा 47 प्रतिशत महिलाओं को शामिल किया गया। मनरेगा में प्रति अकुशल मजदूर को 180 रुपये दिये जाते हैं। इसका प्रभाव व्यापक रूप से पड़ा है। निजी कार्यों के लिए भी पारंपरिक मजदूरी जोकि अपेक्षाकृत काफी कम थी, इसके प्रभाव स्वरूप बढ़ गई है।
निश्चित रूप से मनरेगा न केवल ग्रामीण रोजगार के लिए लाभकारी सिद्ध हुआ है बल्कि इसने ग्रामीणों की सामाजिक- आर्थिक स्थिति को सुधारने का मौका भी प्रदान किया है।

मनरेगा की सफलता के आयाम


मनरेगा की सफलता का एक और आयाम यह है कि इसकी बदौलत गांवों में विकास कार्यों तथा स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण को नई गति मिल रही है। यह कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध हो रहा है। इसे चलाने में पंचायती राज संस्थाओं की सक्रिय भूमिका के चलते ग्रामीण प्रशासन का विकेंद्रीकरण हो रहा है और इस तरह लोकतंत्र तथा पारदर्शिता की जड़ें मजबतू हो रही है. इस कार्यक्रम के अंतर्गत ऐसे काम हाथ में लिए हैं जिनमें श्रम की अधिक आवश्यकता होती है.अब सिंचाई कार्यक्रम, जल आपूर्ति तथा पशुपालन जैसे नए कार्य भी मनरेगा में शामिल कर लिए गए हैं। यही नहीं, कानून में यह भी शर्त है कि काम के स्थानों पर श्रमिकों के लिए पीने के पानी, बच्चों के लिए बाल केन्द्र, आराम करने के लिए शेड आदि की व्यवस्था की जाए। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए यह आवश्यक है कि रोज़गार पाने वालों में कम से कम एक तिहाई संख्या महिलाओं की हो। इससे ग्रामीण जनता में बचत की आदत को भी प्रोत्साहन मिल रहा है. इसमें कामगारों की मजदूरी सीधे डाकघरों, और बैंकों में जाते हैं, मनरेगा का ग्रामीण रोजगार को गति देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

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Feb 12, 2016

Some Fantastico Use of Beetroot in Hindi

चुकंदर के कुछ बेहतरीन प्रयोग


आयुर्वेद के अनुसार चुकंदर का दो -तीन कतरा सलाद के रूप में नियमित खाते रहने से शरीर कई बीमारियों से लड़ने में सक्षम हो जाता है। गर्भवती महिलाओं को इसका जरुर सेवन जरूर करना चाहिए। गर्भावस्था के दरम्यान आमतौर पर खून की कमी की समस्या हो जाती है, जिसे एनीमिया या रक्ताल्पता कहा जाता है। जो महिलाएं चुकंदर का नियमित सेवन करती हैं, उन्हें रक्ताल्पता की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। कई बार बच्चे भी रक्ताल्पता के शिकार हो जाते हैं। वे अक्सर बीमार रहने लगते हैं। ऐसे बच्चे यदि चुकंदर का जूस पियें तो लाभकारी रहता है। यह अमारैन्थ परिवार का एक पादप सदस्य है। यह कई रूपों में पैदा होता है। यह एक तरह की जड़ है। आमतौर पर यह लाल रंग का होता है। कुछ स्थानों पर सफेद चुकंदर भी पाए जाते हैं। इसके पत्ते को शाक के रूप में प्रयोग किया जाता है।

Picture Courtesy: www.greeninbio.com


चुकंदर के कुछ औषधीय गुण निम्नलिखित हैं:


चुकंदर एनीमिया को दूर करता है : एनीमिया के लिए चुकंदर रामबाण माना जाता है। चुकंदर में पर्याप्त मात्रा में आयरन, विटामिन और मिनरल्स होते हैं, जो खून को बढ़ाने और उसे साफ करने का काम भी करते हैं। यही वजह है कि महिलाओं को इसे नियमित रूप से खाने की सलाह दी जाती है।

किडनी में फायदेमंद : चुकंदर में गुर्दे (किडनी) को स्वस्थ एवं साफ रखने के गुण मौजूद हैं। किडनी से प्रभावित लोगों को चुकंदर का रस देना फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद क्लोरीन लीवर और किडनी को साफ करने में मदद करता है।

पित्ताशय के लिए गुणकारी : विभिन्न शोध में यह पाया गया है कि यह किडनी के साथ ही पित्ताशय के लिए भी कारगर है। इसमें मौजूद पोटेशियम शरीर को प्रतिदिन पोषण प्रदान करने में मदद करता है तो वहीं क्लोरीन लीवर और किडनी को साफ करने में मदद करता है।

पाचन में गुणकारी :  बच्चों एवं युवाओं को चुकंदर चबा-चबाकर खाना चाहिए। इससे दांत और मसूड़ों को मजबूती मिलती है। यह पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है। इसका नियमित सेवन करने से अपाच्य की समस्या आती ही नहीं है। चुकंदर में बेटेन नामक तत्व पाया जाता है।
दरअसल, आंत और पेट को साफ करने के लिए शरीर को बेटेन की जरूरत होती है और चुकंदर में मौजूद यह तत्व उसकी आपूर्ति करता है। बढ़ती उम्र के बच्चों को चुकंदर जरूर खिलाना चाहिए। इससे उनका शारीरिक सौष्ठव बेहतर होता है। बच्चों के चेहरे पर चमक दिखती है।

उल्टी-दस्त : यदि उल्टी-दस्त की शिकायत हो तो चुकंदर के रस में चुटकीभर नमक मिलाकर पिलाना फायदेमंद रहता है। इससे पेट में बनने वाली गैस खत्म हो जाती है। उल्टी बंद होने के साथ ही दस्त भी नहीं होता है।

पीलिया में लाभकारी : चुकंदर पीलिया के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। पीलिया के मरीजों को चुकंदर का रस थोड़ा-थोड़ा दिन में चार बार देना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि एक बार में एक कप से ज्यादा जूस नहीं देना चाहिए।

हाइपरटेंशन : चुकंदर का जूस हाइपरटेंशन और हृदय संबंधी समस्याओं से दूर रखता है। इसके नियमित सेवन करने से चिड़चिड़ापन दूर हो जाता है। खासतौर पर स्त्रियों के लिए यह बहुत लाभकारी होता है।

मासिक धर्म में लाभकारी : मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को कमर, पेड़ू दर्द एवं अन्य शारीरिक दुर्बलता जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। चुकंदर का नियमित प्रयोग करते रहने से मासिक धर्म के दौरान होने वाला कष्ट नहीं होता है। माहवारी खुल कर आती है। इस दौरान होने वाली सुस्ती भी दूर रहती है।

जोड़ों का दर्द : बढ़ती उम्र में जोडों के दर्द की एक बड़ी समस्या सामने आती है। खासतौर से महिलाओं
में 50 की उम्र पार करते ही यह बीमारी आम हो जाती है। ऐसी स्थिति में चुकंदर का नियमित जूस पीकर इस बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है। इससे दर्द में ही राहत नहीं मिलती बल्कि हड्डियां भी मजबूत बनती हैं।

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