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Jul 21, 2017

Gram Panchayat Raj Nayanagar Dularpur Raatgaon Aadharpur

ग्राम पंचायत राज नयानगर, दुलारपुर, रातगाँव, आधारपुर मुखिया और सरपंच सूची 

दुलारपुर- आधारपुर पंचायत 

1. रामफल सिंह                निर्विरोध        मुखिया १९५२ 
    देवनारायण सिंह      मनोनीत       सरपंच १९५२ 

2.  देवनारायण सिंह     -     मुखिया १९५७ 
    उपेन्द्र कुंवर                 -             सरपंच   १९५७ 

3. देवनारायण सिंह     -    मुखिया         १९६२
      उपेन्द्र कुंवर        -   सरपंच      १९६२

4. रामचंद्र कुंवर       - मुखिया         १९७१
    राजेंद्र प्रसाद सिंह     - सरपंच         १९७१ (बाद में विधायक बने)

५. रामचंद्र कुंवर           -       मुखिया १९७९
   भूपेंद्र बिहारी मिश्र         - सरपंच १९७९ 

नयानगर (दुलारपुर) पंचायत 


1.  राजेंद्र प्रसाद सिंह   -          मुखिया   १९७९ (बाद में विधायक बने)
      बबन सिंह      -                  सरपंच १९७९  

रातगाँव पंचायत 

1. सुनील कुमार सिंह भुल्लू -          मुखिया          २००१ 

2. रीता देवी         -            मुखिया          २००६ 
    रंजीत कुमार सिंह    -            सरपंच         २००६ 

3. रीता देवी         -            मुखिया         २०११  
राकेश चौधरी (महंथ)  -           सरपंच           २०११ 

4. सुमन कुमारी        -           मुखिया           २०१६ 
   इंदु देवी               -           सरपंच          २०१६   

Mar 18, 2017

Space Walk Dream #ColgateMagicalStories

स्पेस या अन्तरिक्ष के किस्से हमेशा से लोकप्रिय और मनोरंजक होते हैं. जब से टीवी में बच्चों के लिए तरह -तरह के सीरियल आदि आने लगे हैं, तब से बच्चों की कल्पना की उड़ान नयी- नयी चीजें सोचनी शुरू कर दी है. भूत-प्रेत, जादू -टोना और राजा -रानी की कहानियों के अलावे भी बहुत ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ बच्चे बहुत बेहतर सोच और ज्ञान रखते हैं.

जब से कोलगेट ने अपना सैंपल भेजा है, और मेरा बेटा आशु ने जबसे उसके सभी चरित्र को देखा है उसने कई कहानियां बना डाली. हर बार कुछ न कुछ नया. मैं उसके द्वारा सुनाई गयी एक मैजिकल स्टोरी यहाँ share करने जा रही हूं.

" मम्मा! रात को मैंने सपने में देखा कि मेरा और मेरी दोस्त ज्योत्सना का चयन स्पेस वाक के लिए हुआ है. कुछ दिनों के ट्रेनिंग के बाद मुझे और मेरी दोस्त को satellite में बैठकर स्पेस में भेजे जाने का प्रोग्राम था. मुझे यह बताया गया कि किस तरह से satellite द्वारा हम दोनों को इंटरनेशनल स्पेस सेंटर तक भेजा जाएगा. हमारा खाना tube में रहेगा, जैसे कोलगेट टूथपेस्ट होता है. हमें जीरो गुरुत्वाकर्षण के बारे में बताया गया और उसमें एक स्थान से दूसरे स्थान तक कैसे जाना है, उसका डमी करके दिखाया गया. स्पेस वाक से सम्बंधित और भी तकनीकी जानकारी दी गयी.



एक निश्चित दिन को हम दोनों श्री हरिकोटा से उड़ान भरने को तैयार थे. हमारे कई मित्र भी हमें देखने आये थे. हम दोनों satellite के अन्दर अपना स्पेशल जैकेट पहनकर बैठ गए. काउंट डाउन शुरू हुआ और हमारा उपग्रह तेजी से आसमान की ऊँचाइयों को पार करता चला गया.हाँ बहुत ही रोमांचक और डरा देने वाला था. कुछ ही मिनटों में हम स्पेस में पहुच चुके थे. वहां से हमें सारे ग्रह, नक्षत्र और उपग्रह साफ़ साफ़ दीख रहे थे. स्पष्ट और चमकीले ग्रह जैसे मानो मुख में चमकीले दांत हों. 




हमारा अंतरिश स्टेशन घर जैसा ही था, लेकिन वहां हमें चलने में बहुत मेहनत करनी पड़ती थी. अगले दिन हम दोनों स्पेस वाक के लिए निकले. स्पेस बहुत ही साफ़ और विशाल था. वहां से हमारी धरती भी साफ़ साफ़ दीख रही थी. हाँ उसका रंग थोडा काला दीख रहा था. 




इसी दौरान हमने देखा कि एक छोटा सा प्लेनेट दीख रहा है. हम लोग जबतक वहां पहुँच पाते कुछ एलियन हमारे पास आये और हम दोनों को पकड़ लिया और अपने ग्रह पर ले गए. उनके हाव भाव अच्छे नहीं थे. वे लोग बहुत गंदे दीख रहे थे. उनके दांत बदबू दे रहे थे. मैंने ज्योत्सना को अपने all time kit box से कोलगेट निकालकर उनको देने को कहा. पहले तो वे लोग नहीं ले रहे थे लेकिन जब उन्होंने लिया तो हमने sign language में उनको उसे दांत में लगाने को कहा. जैसे ही उन्होंने लगाया, बहुत बड़ा मैजिक हुआ. उनके दांत के सारे कीटाणु मर गए और उन्हें अच्चा फील हुआ. उन लोगों ने हमें बहुत सारा गिफ्ट दिया और हम जैसे ही गिफ्ट ले रहे थे तभी मम्मा की आवाज आई - " उठो आशु! स्कूल नहीं जाना है क्या? "


सचमुच यह बहुत ही प्यारा ड्रीम था.



“I’m blogging my #ColgateMagicalstories at BlogAdda in association with Colgate.



Feb 15, 2017

रिश्तों को ख़त्म कर रहा है मोबाइल फ़ोन

इसमें कोई दो राय नहीं है कि मोबाइल फ़ोन या टेबलेट जैसे आधुनिक यन्त्र हमारी जरुरत बन गए हैं. लेकिन कही ये हमारे रिश्तों को खतम तो नहीं कर रहे हैं.

मैं अपने एक जाननेवाले के यहाँ गयी. वहां तीन लोग थे. तीनों ने आपस में इशारों से हाय हेलो किया और फिर लग  गए अपने अपने मोबाइल फ़ोन में. कोई 15 -20 मिनट तक शायद ही किसी से किसी से बात की हो. मैं तो आश्चर्य में थी. यह हो क्या रहा है? आखिर ये लोग मोबाइल से चिपके क्यों हैं?


दूसरी बार एक रेस्टोरेंट में गयी. मेरे सामने वाली टेबल पर एक पति पत्नी बैठे थे. बेटर आया और उन लोगों से आर्डर ले गया. आर्डर ले जाने से खाना लाने तक का समय कैसा बिताया उन दोनों ने. पति अपने टेबलेट पर गेम खेलते रहे और पत्नी अपने फ़ोन से किसी से बात में लगी रही. यह देखकर बहुत ही अजीब लगा कि आखिर मोबाइल फ़ोन और आधुनिक उपकरणों ने हमसे आपस में बात करना तक छीन लिया है.

आपने भी बहुत सारे ऐसे अवसर देखें होंगे जहाँ लोग मोबाइल में लगे रहते हैं. आखिर इससे हमारे रिश्ते भी तो प्रभावित होते हैं. कई बार आपस में बात करने से लोगों का तनाव दूर होता है. हम एक दूसरे को समझते हैं और उनके साथ हमारा सरोकार होता है. 



लेकिन आज के  इस मोबाइल प्रधान समाज में लोगों के पास गेम खेलने का तो वक़्त है लेकिन अपने आस पड़ोस के लोगों के साथ,या बच्चों के साथ, परिवार के साथ बात करने का समय नहीं होता. इस पर आप भी विचार करें. हमारे कार्यों का हर प्रतिबिम्ब आपको दीख जाएगा. 

जीवन में साम्य होना बहुत जरुरी है. गैजेट्स का गुलाम बनना दुनिया के सबसे विकसित प्राणी को शोभा नहीं देता. इस post को पढने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद!

Nov 4, 2016

A Letter to Life #DearZindagi Activity

“I am writing a letter to life for the #DearZindagi activity at BlogAdda“.

डियर  ज़िन्दगी

सबसे पहले तो मैं तुझे अपने में मुझे बनाये रखने और अपनी साँसों को मेरी सांसों में समाये - बनाये रखने के लिए बहुत – बहुत धन्यवाद देती हूँ. तू है तो मैं हूँ, जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं. मैं यह पत्र इसलिए लिख रही हूँ ताकि मैं तुम्हें यह बता सकूँ कि मैं तुम्हें अपने में पाकर कैसा महसूस कर रही हूँ.

तुम्हारे कितने रूप हैं. कुछ ऐसे पल होते हैं जिनको याद कर मैं बहुत खुश हो जाती हूँ, कुछ लम्हे ऐसे भी हैं, जो आज भी याद आती हैं तो रोम-रोम पुलकित हो जाती हैं. कुछ पल उदास भी कर जाती हैं. यदि मैं उन लम्हों का लेखा-जोखा तैयार करूँ तो एक ग्रन्थ तैयार हो जाए.

आज मैं इस पत्र में उन सुखद एहसासों का जिक्र करना चाहूंगी जिसने मुझे जीने के नए मायने दिए हैं.
बचपन की वो यादें आजतक मैंने बहुत ही सहेज कर रखी हैं. जब मैं अपने बाबुल के आँगन में फुदकती रहती थी. प्यार और दुलार से सराबोर तुम न जाने कब मुझे यौवन की दहलीज पर लाकर छोड़ दिया.

यौवन का एहसास आते ही मन रोमांचित हो उठता है. पढाई-लिखाई के साथ साथ साजन की बातें, प्यार – मोहब्बत की बातें मन को कभी-कभी विचलित कर जाती थीं.

जिसकी ज़िन्दगी में प्यार न हो उसका जीवन बेकार. तुम्हारा दूसरा नाम प्यार भी है. कहते हैं प्यार, इश्क और मोहब्बत सभी अधूरे होते हैं. एक में आधा है. एक में आधा है तो एक में आधाहै. लेकिन यह सिर्फ कहने की बात है. एक प्यार भरी ज़िन्दगी सुखद एहसास भरी होती है.

तुमने मुझे हर तरह का प्यार दिया, हर एक एहसास दिया. मां बाप का प्यार, भाई- बहन का प्यार, जीवन साथी का प्यार और बच्चों का प्यार.

लोग तुमसे शिकवा और शिकायत भी करते हैं कि मेरे ज़िन्दगी भी कोई ज़िन्दगी है, वगैरह, वगैरह. लेकिन ऐसे लोग न तुम्हें जान पाते हैं और न ही तुम्हारी कदर कर पाते हैं. तू ही तो पहचान है, तुझसे ही हर अरमान है, तू ही तो वरदान है. तेरी अनुकम्पा से ही दुनिया के विविध रूपों को देखने का अवसर मिलता है. तू नहीं तो मानव तन मिट्टी का माधो!


मैं कुछ पलों का जिक्र करना चाहूंगी, जिसे आज भी याद कर मुझे बहुत सुखद एहसास होता है. जब तूने मेरी गोद में एक नन्ही-सी परी का सुख दिया, माँ की ममता जाग उठी और उस समय को, और उस घड़ी को याद कर बहुत सुखद आनंद मिलता है. प्रसव वेदना के पश्चात नन्हीं परी का आगमन, और उसको गोद में लेने के बाद अवर्णनीय सुख का एहसास; यही तो तुम्हारी ख़ासियत है.

ज़िन्दगी का नाम जीने में है. तुमसे क्या विरोध? तुम्हारे बिना सब सून! तुमने मुझे आजतक जो कुछ भी दिया है, इसके लिए मैं तुम्हारी शुक्रगुजार हूँ. तुम तो जानती हो कि दुःख और वेदना के भी कुछ पल आये. खोने और रोने के भी पल आये. लेकिन तुमने मुझे उनसे लड़ना सिखाया. मैं उनसे भिड़ी, लड़ी और आगे  बढ़ी. ज़िन्दगी में अमृत है तो गरल भी है. तुमने दोनों को स्वीकारने की शक्ति दी. तुम मेरे हर पल की सहेली हो. तुम मेरी ऐसी सखी हो, जिसे मेरे बारे में सब पता है. मैं चाहकर भी तुमसे पृथक नहीं हो सकती. तुम हो, तो ही मैं हूँ. तुमसे ही मेरा नाम, मेरा काम, मेरा दाम और मेरा सुबहो-शाम है. तुमसे ही जीवन, तुमसे ही उल्लास, तुमसे ही आत्मा और तुमसे ही परमात्मा है.

इसी तरह से मेरा संबल बनी रहो.

तुम्हारी सहेली

सुमन



Oct 23, 2016

Dhruv Jaisi Siddhi ध्रुव जैसी सिद्धि

हमारे देश में कई वीर और विशिष्ट बालक हुए हैं. जैसे  अर्जुन, एकलव्य,प्रहलाद आदि. ये बालक अपने लक्ष्य को पाने हेतु किये गए प्रयासों के लिए आज हमारे लिए दृष्टांत बन गए हैं. ध्रुव  की साधना तथा लक्ष्य सिद्धि की कथा बहुत ही प्रेरणादायक है.


ध्रुव के जीवन चरित्र को लेकर श्री चन्द्रशेखर पाण्डेय ‘चन्द्र्मणी’जी ने बड़ी ही सुंदर कविता लिखी है. जिसे कल्याण के बालक अंक में छपा गया है. मैंने चन्द्रमणि जी की कविता साभार लिया है. यह कविता इस प्रकार है -

(1)
“जन्म ही हुआ था जिसका तपोवनों के बीच,
वनवासियों ने  सूतिका - गृह   संवारा था
शीतल-सुगंध-मंद  मलय    समीर   द्वारा
दोलित   लताओं   ने  समोद पुचकारा था
यद्दपि   न  पाया  मोद   पितृ   गोद   का,
परन्तु माता करूणामयी ने प्रेम से दुलारा था
प्यारा था सभी को प्राण से भी वह बाल ध्रुव,
 संतत-सुनीति-नयनों का बना तारा

 (2)

आया था बुलाने से पिता की गोद में बैठने को,
किन्तु हा ! विमाता का कतु-वचन सुनना पड़ा
वचन नहीं,   बाण थे,  हुए हिय के पार,
अन्तर की वेदना से सिर धुनना पड़ा ||
आन का महान अपमान हो गया था, इस
हेतु चिन्तन में कुछ और गुनना पड़ा |
ध्रुव नाम सार्थक बनाने को धरा के बीच,
घोर तप का प्रशस्त पथ चुनना पड़ा ||


(3)

नारद से पा के उपदेश, मधुबन जाके,
तन को तुरीय तपश्चर्या में मिला दिया |
प्यासे प्रन्धारियों को, प्राणवीर बालक ने 
हरिनाम कीर्तन का अमृत पिला दिया ||
ध्यान योग-सिद्धि से समाधि की दशा को प्राप्त
‘चन्द्र्मणी’ मानवों को सिखला दिया |
श्वासन को जीत, लिया आसन था इस तौर,
विष्णु भुजगासन  का आसन हिला दिया ||

(4)

पाके वर विष्णु से विशेष लोक का प्रसाद,
भक्त ध्रुव का स्वागत ही विचित्र हो गया |
समदृष्टि, दृष्टि में रमा था रमणीय रूप,
तन-मन-जीवन   सभी पवित्र हो गया ||
‘चन्द्र्मणी’  चाहना रही न चल सम्पदा की, 
चौदहों-भुवन-चन्द्रिका  चरित्र हो गया |
वनवास राज्य के सुखों का चलचित्र हुआ,
कल जो बना था शत्रु, आज मित्र हो गया |

(5)

शुद्ध सात्विकी स्वभाव, सत्संगति से 
जीवन में भक्ति धन अधिक कम लिया |
‘चन्द्र्मणी’ चक्रवर्ति राज्य से वीराः रहा,
अंगराग नहीं, तन भस्म ही रमा लिया ||
शासन में पूर्ण अनुशासन प्रज्ञा पी रहा,
त्रास न किसी को, शस्त्र शांति औ’क्षमा लिया |
ध्रुव अघनाश्क को रोक-टोक थी न कुछ,
ध्रुव लोक में ही आसन जमा लिया ||

भक्त प्रहलाद की तरह ध्रुव भी ईश्वर के अटल भक्त थे. भगवान का प्रेम और आशीर्वाद पाने के लिए उन्होंने क्या-क्या कष्ट नहीं सहे. अपने लक्ष्य की सघन-साधना से वे संसार में सबसे ऊँचे स्थान पर अर्थात आकाश  मंडल में जा विराजे, इसी प्रकार व्यक्ति यदि हिम्मत न हारकर अपनी कार्य-साधना में लगा रहता है तो वह एक दिन लक्ष्य के शिखर को अवश्य पाकर ही रहता है.

ध्रुव और प्रहलाद का नाम आज संसार में अमर है और आगे भी अमर रहेगा . किसी भी सच्चे लक्ष्य के कार्य- साधना व्यक्ति को सरे जग में अमरता और प्रसिद्धि प्रदान करती है |