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Nov 4, 2016

A Letter to Life #DearZindagi Activity

“I am writing a letter to life for the #DearZindagi activity at BlogAdda“.

डियर  ज़िन्दगी

सबसे पहले तो मैं तुझे अपने में मुझे बनाये रखने और अपनी साँसों को मेरी सांसों में समाये - बनाये रखने के लिए बहुत – बहुत धन्यवाद देती हूँ. तू है तो मैं हूँ, जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं. मैं यह पत्र इसलिए लिख रही हूँ ताकि मैं तुम्हें यह बता सकूँ कि मैं तुम्हें अपने में पाकर कैसा महसूस कर रही हूँ.

तुम्हारे कितने रूप हैं. कुछ ऐसे पल होते हैं जिनको याद कर मैं बहुत खुश हो जाती हूँ, कुछ लम्हे ऐसे भी हैं, जो आज भी याद आती हैं तो रोम-रोम पुलकित हो जाती हैं. कुछ पल उदास भी कर जाती हैं. यदि मैं उन लम्हों का लेखा-जोखा तैयार करूँ तो एक ग्रन्थ तैयार हो जाए.

आज मैं इस पत्र में उन सुखद एहसासों का जिक्र करना चाहूंगी जिसने मुझे जीने के नए मायने दिए हैं.
बचपन की वो यादें आजतक मैंने बहुत ही सहेज कर रखी हैं. जब मैं अपने बाबुल के आँगन में फुदकती रहती थी. प्यार और दुलार से सराबोर तुम न जाने कब मुझे यौवन की दहलीज पर लाकर छोड़ दिया.

यौवन का एहसास आते ही मन रोमांचित हो उठता है. पढाई-लिखाई के साथ साथ साजन की बातें, प्यार – मोहब्बत की बातें मन को कभी-कभी विचलित कर जाती थीं.

जिसकी ज़िन्दगी में प्यार न हो उसका जीवन बेकार. तुम्हारा दूसरा नाम प्यार भी है. कहते हैं प्यार, इश्क और मोहब्बत सभी अधूरे होते हैं. एक में आधा है. एक में आधा है तो एक में आधाहै. लेकिन यह सिर्फ कहने की बात है. एक प्यार भरी ज़िन्दगी सुखद एहसास भरी होती है.

तुमने मुझे हर तरह का प्यार दिया, हर एक एहसास दिया. मां बाप का प्यार, भाई- बहन का प्यार, जीवन साथी का प्यार और बच्चों का प्यार.

लोग तुमसे शिकवा और शिकायत भी करते हैं कि मेरे ज़िन्दगी भी कोई ज़िन्दगी है, वगैरह, वगैरह. लेकिन ऐसे लोग न तुम्हें जान पाते हैं और न ही तुम्हारी कदर कर पाते हैं. तू ही तो पहचान है, तुझसे ही हर अरमान है, तू ही तो वरदान है. तेरी अनुकम्पा से ही दुनिया के विविध रूपों को देखने का अवसर मिलता है. तू नहीं तो मानव तन मिट्टी का माधो!


मैं कुछ पलों का जिक्र करना चाहूंगी, जिसे आज भी याद कर मुझे बहुत सुखद एहसास होता है. जब तूने मेरी गोद में एक नन्ही-सी परी का सुख दिया, माँ की ममता जाग उठी और उस समय को, और उस घड़ी को याद कर बहुत सुखद आनंद मिलता है. प्रसव वेदना के पश्चात नन्हीं परी का आगमन, और उसको गोद में लेने के बाद अवर्णनीय सुख का एहसास; यही तो तुम्हारी ख़ासियत है.

ज़िन्दगी का नाम जीने में है. तुमसे क्या विरोध? तुम्हारे बिना सब सून! तुमने मुझे आजतक जो कुछ भी दिया है, इसके लिए मैं तुम्हारी शुक्रगुजार हूँ. तुम तो जानती हो कि दुःख और वेदना के भी कुछ पल आये. खोने और रोने के भी पल आये. लेकिन तुमने मुझे उनसे लड़ना सिखाया. मैं उनसे भिड़ी, लड़ी और आगे  बढ़ी. ज़िन्दगी में अमृत है तो गरल भी है. तुमने दोनों को स्वीकारने की शक्ति दी. तुम मेरे हर पल की सहेली हो. तुम मेरी ऐसी सखी हो, जिसे मेरे बारे में सब पता है. मैं चाहकर भी तुमसे पृथक नहीं हो सकती. तुम हो, तो ही मैं हूँ. तुमसे ही मेरा नाम, मेरा काम, मेरा दाम और मेरा सुबहो-शाम है. तुमसे ही जीवन, तुमसे ही उल्लास, तुमसे ही आत्मा और तुमसे ही परमात्मा है.

इसी तरह से मेरा संबल बनी रहो.

तुम्हारी सहेली

सुमन



Oct 23, 2016

Dhruv Jaisi Siddhi ध्रुव जैसी सिद्धि

हमारे देश में कई वीर और विशिष्ट बालक हुए हैं. जैसे  अर्जुन, एकलव्य,प्रहलाद आदि. ये बालक अपने लक्ष्य को पाने हेतु किये गए प्रयासों के लिए आज हमारे लिए दृष्टांत बन गए हैं. ध्रुव  की साधना तथा लक्ष्य सिद्धि की कथा बहुत ही प्रेरणादायक है.


ध्रुव के जीवन चरित्र को लेकर श्री चन्द्रशेखर पाण्डेय ‘चन्द्र्मणी’जी ने बड़ी ही सुंदर कविता लिखी है. जिसे कल्याण के बालक अंक में छपा गया है. मैंने चन्द्रमणि जी की कविता साभार लिया है. यह कविता इस प्रकार है -

(1)
“जन्म ही हुआ था जिसका तपोवनों के बीच,
वनवासियों ने  सूतिका - गृह   संवारा था
शीतल-सुगंध-मंद  मलय    समीर   द्वारा
दोलित   लताओं   ने  समोद पुचकारा था
यद्दपि   न  पाया  मोद   पितृ   गोद   का,
परन्तु माता करूणामयी ने प्रेम से दुलारा था
प्यारा था सभी को प्राण से भी वह बाल ध्रुव,
 संतत-सुनीति-नयनों का बना तारा

 (2)

आया था बुलाने से पिता की गोद में बैठने को,
किन्तु हा ! विमाता का कतु-वचन सुनना पड़ा
वचन नहीं,   बाण थे,  हुए हिय के पार,
अन्तर की वेदना से सिर धुनना पड़ा ||
आन का महान अपमान हो गया था, इस
हेतु चिन्तन में कुछ और गुनना पड़ा |
ध्रुव नाम सार्थक बनाने को धरा के बीच,
घोर तप का प्रशस्त पथ चुनना पड़ा ||


(3)

नारद से पा के उपदेश, मधुबन जाके,
तन को तुरीय तपश्चर्या में मिला दिया |
प्यासे प्रन्धारियों को, प्राणवीर बालक ने 
हरिनाम कीर्तन का अमृत पिला दिया ||
ध्यान योग-सिद्धि से समाधि की दशा को प्राप्त
‘चन्द्र्मणी’ मानवों को सिखला दिया |
श्वासन को जीत, लिया आसन था इस तौर,
विष्णु भुजगासन  का आसन हिला दिया ||

(4)

पाके वर विष्णु से विशेष लोक का प्रसाद,
भक्त ध्रुव का स्वागत ही विचित्र हो गया |
समदृष्टि, दृष्टि में रमा था रमणीय रूप,
तन-मन-जीवन   सभी पवित्र हो गया ||
‘चन्द्र्मणी’  चाहना रही न चल सम्पदा की, 
चौदहों-भुवन-चन्द्रिका  चरित्र हो गया |
वनवास राज्य के सुखों का चलचित्र हुआ,
कल जो बना था शत्रु, आज मित्र हो गया |

(5)

शुद्ध सात्विकी स्वभाव, सत्संगति से 
जीवन में भक्ति धन अधिक कम लिया |
‘चन्द्र्मणी’ चक्रवर्ति राज्य से वीराः रहा,
अंगराग नहीं, तन भस्म ही रमा लिया ||
शासन में पूर्ण अनुशासन प्रज्ञा पी रहा,
त्रास न किसी को, शस्त्र शांति औ’क्षमा लिया |
ध्रुव अघनाश्क को रोक-टोक थी न कुछ,
ध्रुव लोक में ही आसन जमा लिया ||

भक्त प्रहलाद की तरह ध्रुव भी ईश्वर के अटल भक्त थे. भगवान का प्रेम और आशीर्वाद पाने के लिए उन्होंने क्या-क्या कष्ट नहीं सहे. अपने लक्ष्य की सघन-साधना से वे संसार में सबसे ऊँचे स्थान पर अर्थात आकाश  मंडल में जा विराजे, इसी प्रकार व्यक्ति यदि हिम्मत न हारकर अपनी कार्य-साधना में लगा रहता है तो वह एक दिन लक्ष्य के शिखर को अवश्य पाकर ही रहता है.

ध्रुव और प्रहलाद का नाम आज संसार में अमर है और आगे भी अमर रहेगा . किसी भी सच्चे लक्ष्य के कार्य- साधना व्यक्ति को सरे जग में अमरता और प्रसिद्धि प्रदान करती है |

Aug 19, 2016

Sri Krishna Bhajan Mera Aapki Kripa Se Sab Kaam Ho Raha Hai

मेरा आपकी कृपा से
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा है।
करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है।।
मेरा आपकी कृपा से...

पतवार के बिना ही, मेरी नाव चल रही है,
हैरान है जमाना, मंजिल भी मिल रही है।
करता नहीं हूँ कुछ भी, सब काम हो रहा है।।
मेरा आपकी कृपा से...

तुम साथ हो जो मेरे, किस बात की कमी है,
किसी और वक्त की अब, दरकार ही नहीं है।
तेरे साथ से गुलाम अब, गुल्फाम हो रहा है।।
मेरा आपकी कृपा से...

मैं तो नहीं हूँ काबिल, तेरा प्यार कैसे  पाऊँ,
टूटी हुई वाणी से, गुणगान कैसे गाऊँ।
तुम्हरी ही प्रेरणा से, ये कमाल हो रहा है।।
मेरा आपकी कृपा से...




Sri Krishna Bhajan Mera Aapaki Kripa Se

mera aapakee kripa se, sab kaam ho raha hai.
karate ho tum kanhaiya, mera naam ho raha hai ..
mera aapakee kripa se ...

patavaar ke bina hee, meri naav chal rahee hai,
hairaan hai jamaana, manjil bhee mil rahee hai.
karata nahin hoon kuchh bhee, sab kaam ho raha hai ..
mera aapakee kripa se ...

tum saath ho jo mere, kis baat kee kamee hai,
kisi aur vakt kee ab, darakaar hee nahin hai.
tere saath se gulaam ab, gulphaam ho raha hai ..
mera aapakee kripa se ...

main to nahin hoon kaabil, tera pyaar kaise paoon,
tootee huee vaanee se, gunagaan kaise gaoon.
tumharee hee prerana se, ye kamaal ho raha hai ..
mera aapakee kripa se ...

Listen to this song on youtube.

Aug 5, 2016

देशाटन से लाभ


जीवन की वास्तविकता गतिशीलता में निहित है. मनुष्य को अपने जीवन में विकास करने के लिये उसका जीवन उन्मुक्त, स्वच्छंद और बन्धन हीन होना बहुत जरुरी है. उसके मन में नवीन वस्तुओं, दृश्यों और स्थानों के प्रति कौतुहल और जिज्ञासा होनी चाहिए. यही मनोवृत्ति देशाटन करने को प्रेरित करता है.



Deshatan Se Labh Hindi Essay
देशाटन या यात्रा का अर्थ है नए स्थानों, नए नगरों, नयी संस्कृतियों, नयी वेशभूषा, नए रीति रिवाज, प्राकृतिक सौन्दर्य और विविध प्रकार के जीव -जंतुओं  को निकट से देखने, उनकी निकटता का आनंद लेने और ज्ञान वृद्धि. यात्रा करने से मन की संकुचित भावना मिट जाती है. मस्तिष्क को चिंतनशील और क्रियाशील बनाने के लिये यात्रा करना बहुत जरुरी होता है. यात्रा करने से चूँकि वातावरण परिवर्तन हो जाता है, इसलिए मनुष्य के मन और मस्तिष्क में नवीनता आ जाती है. 

यात्रा के पूर्व की तैयारी कैसे करें :  यात्रा पर जाने से पहले कुछ तैयारी कर लेना बहुत जरुरी होता है. मेरा तो मानना है कि सबसे पहले आप जहाँ जा रहे हैं वहां जाने का ट्रेन टिकट या वायुयान का टिकट  का पता कर लें. यदि आपकी यात्रा देश के अन्दर ही करनी है तो आप घरेलू  एयरलाइन से टिकट  का ticket खरीद लें. यदि आप देश से बाहर जाने की सोच रहे हैं तो आपको अन्तराष्ट्रीय एयरलाइन  का ticket लेना पड़ेगा. हमें यदि गंतव्य तक जाने के लिये कोई सहयात्री मिल जाए जो जहाँ हम जा रहे हैं वहां की भाषा से पूर्ण परिचित हो, उसे वहां का रीति-रिवाज अच्छे से पता हो, वहां के ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थलों का भी ज्ञान हो. जिस स्थान की यात्रा की जानी है, वहां की जलवायु के बारे में पूरी जानकारी लेनी चाहिए और उसी के अनुसार वस्त्र इत्यादि का भी प्रबंध करके जाना चाहिए.

यात्रा ज्ञान का स्रोत : आत्मनिर्भर बनने के लिये यात्रा का बहुत महत्व है. इससे मनुष्य शिक्षा संबंधी ज्ञान प्राप्त करता है. जिन ऐतिहासिक और धार्मिक स्थानों का अध्ययन  केवल पाठ्यपुस्तक में ही किया जाता है, उसका ज्ञान क्षीण होता है. यदि हम उन स्थानों को प्रत्यक्ष देख लेते हैं तो हमारा ज्ञान और भी दृढ हो जाता है. हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, और सारनाथ के भग्नावशेष, अजंता और एलोरा की गुफाएं, बोधगया का मंदिर, आगरे का ताजमहल, दिल्ली का लालकिला आदि का साक्षात दर्शन यात्रा द्वारा ही संभव है. यात्रा करने से अन्य देशों को शासन प्रणाली और सभ्यता का पता चलता है. प्राचीन काल में मेगास्थनीज, फाहियान और ह्वेनसांग जैसे  विदेशी यात्री हमारे देश की यात्रा पर आये. उनकी यात्रा वृत्तांत से हमें काफी कुछ जानकारी मिलती है. कहा गया है कि सर्वश्रेष्ठ शिक्षा अनुभवों से प्राप्त होती है और ये अनुभव हमें यात्रा से प्राप्त होती है.


सचमुच यात्रा या देशाटन से हमारा न केवल मनोरंजन होता है बल्कि हमारा ज्ञान भी समृद्ध होता है और हमारी सोच को व्यापकता मिलती है.


Jul 31, 2016

बिहार की लोक संस्कृति का जीवंत चित्र है फिल्म जट जटिन



सबसे पहले मैं उस व्यक्ति को धन्यवाद देना चाहूँगा जिन्होंने फिल्म जट जटिन  को YouTube पर अपलोड किया जिसकी वजह इसे देख पाना मेरे लिये संभव हुआ. 

कहा गया है कि सिनेमा समाज का आईना होता है. संस्कृति का वाहक होता है और मुख्य कहानी के साथ ही साथ कई छोटी- छोटी घटनाओं का एक क्रमिक विन्यास होता है. हिंदी फीचर फिल्म जट जटिन के संदर्भ में ये बातें बिलकुल सटीक बैठती हैं.  जट जटिन फिल्म की शुरुआत बाहर से एक रिसर्च स्कॉलर के गोदरगावा पुस्तकालय पर आगमन से होता है. जो जन मानस में बसे जट जटिन की लोक कथा के अध्ययन और अन्वेषण के लिये वहां पधारते हैं. वहीँ से जट जटिन फिल्म की शुरुआत होती है. इस फिल्म के निर्माता और लेखक श्री अनिल पतंग जी ने बिहार की लोक संस्कृति में रची- बसी इस लोक नाटिका को फिर से जीवित कर दिया है. शादी के विधि विधान, महिलाओं द्वारा शादी के गीत, आदि का सुन्दर चित्रण किया है. जब बच्चों का जन्म होता है तो बख्खो बखोनी बधाइयाँ देने आते हैं, नाचते गाते हैं और उपहार ले जाते हैं. लगभग हर गाँव में ग्राम देवता की पूजा होती है. ब्रह्म बाबा स्थान एक अति पवित्र स्थान होता है, जिसका कई बार जिक्र आया है इस फिल्म में. जब नायिका के बच्चे को सांप काट लेता है तो उसे भगत जी के पास ले जाया जाता है और भगतई का बहुत बखूबी चित्रण किया गया है. इस फिल्म के द्वारा स्त्री शिक्षा के महत्व को बताया गया है. इसमें दिखाया गया है कि किस प्रकार नायिका पढने स्कूल जाती है और शिक्षा ग्रहण करती है.




इस फिल्म के द्वारा गरीबी, चिकित्सा का अभाव, सामजिक अन्धविश्वास जैसे डायन, पोंगा पंथीपना,  आदि अनेक विषयों को कुशलतापूर्वक दिखाया गया है. समाज का अमीर और दबंग व्यक्ति और उसके परिवार के लोग किस तरह से लोगों के साथ अनाचार और गलत व्यवहार करते हैं, वह स्पष्ट देखा जा सकता है.

इस फिल्म के द्वारा यह भी दिखाया गया है कि कृषि और पशुपालन आधारित सामाजिक व्यवस्था लोगों के जीवन दशा को सुधारने में अक्षम है और इसलिए फिल्म का नायक अपने बच्चे की अच्छी परवरिश के लिये होरी के गोबर की तरह  पलायन कर मोरंग जाता है. यह एक सामाजिक कटु सत्य है कि कृषक परिवार के बच्चे आज भी पलायन कर रहे हैं. 
अब बात करते हैं कलाकरों की. इस फिल्म में अभिनेत्री अमर ज्योति ने बहुत ही दमदार अभिनय और नृत्य किया है. उनके अभिनय की जितनी तारीफ़ की जाय कम ही होगा. नायक राजीव दिनकर का अभिनय भी बढ़िया है. सरपंच का भतीजा चमरू इस फिल्म का मुख्य विलेन है. विलेन के साथ ही साथ वह एक नंबर का लफुआ और बदतमीज है. इस रोल को अमिय कश्यप ने बखूबी निभाया है. 

अब करते हैं इस फिल्म के संगीत की बात. इस फिल्म में कुल 16 गाने हैं. इसमें कुछ गाने तो बिहार की माटी की बोल हैं. जैसे – भैया मलहवा हो नैया लगा दे नदिया के पार (LINK), टिकवा जब जब..., धानमा कुटत जट्टा..., आदि अनेक लोकप्रिय गीत हैं. लेकिन गानों की अधिकता फिल्म को कहीं कहीं बोझिल बना देता है.

इस फिल्म की ज्यादतर शूटिंग मिथिलांचल क्षेत्र में ही हुई है जिससे इसकी मौलिकता स्पष्ट दीखती है. इस फिल्म में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी गयी है जो बहुत ही सराहनीय प्रयास है.  

फिल्म के संवाद में हिंदी के साथ ही साथ स्थानीय शब्दों को शामिल किया गया है जो इसे प्रमाणिक और असरदार बनाता है. कहीं-कहीं फिल्म थोड़ी धीमी हो जाती है. छायांकन और लाइट्स के प्रभाव को और बेहतर बनाया जा सकता था. 

इस फीचर फिल्म को न्यूयॉर्क इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ढाई लाख डॉलर से कम लागत से निर्मित फिल्मों की श्रेणी में मेरिट अवार्ड से सम्मनित किया गया. यह एकमात्र हिंदी फिल्म है जिसे यह गौरव प्राप्त हुआ है. इसके साथ ही साथ इस हिंदी फीचर फिल्म को कई अन्य पुरस्करों से नवाजा गया है.

कुल मिलाकर इस फिल्म के निर्माता निर्देशक बधाई के पात्र हैं एक अच्छी और प्रभाव शाली फिल्म बनाने के लये. बिहार के सांस्कृतिक चेतना को जगाने में यह फिल्म एक महती भूमिका अदा करेगी ऐसा विश्वास है. जट जटिन मात्र एक हिंदी फीचर फिल्म ही नहीं बल्कि बिहार के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का प्रतिबिम्ब है. कुल मिलाकर यह एक बहुत ही शानदार फीचर फिल्म है. 

This post is written by  guest blogger Pankaj Kumar.  Read more most written by Pankaj Kumar on www.behtarlife.com