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Mar 15, 2015

यादगार घर वापसी

इस पोस्ट में मैं एक ऐसी यादगार घटना का जिक्र करना चाहती हूँ जो मेरे 
लिए हमेशा एक यादगार पल रहेगा. बात उन दिनों की है जब मेरी छोटी बहन को बिटिया हुई थी. जब उसका जन्म  कुंडली बनाया गया तो पंडित ने एक विशेष पूजा करने को कहा. मेरी बहन अलीगढ के पास रहती है. इसलिए उस पूजा में हमें जाना बहुत जरुरी था. पति को ऑफिस में छुट्टी नहीं मिली. वह भी नहीं आ सकते थे. बच्चों का स्कूल था, उनके एग्जाम आनेवाले थे, इसलिए वे भी नहीं आये. मुझे ही अकेले जाना पड़ा. क्या करती मैं तीन दिन के लिए बहन के यहाँ अलीगढ चली गयी.
पति ने आश्वासन दिया – कोई बात नहीं. तुम जाओ. मैं यहाँ अपने घर में  सब सम्हाल लूँगा. जिसपर मुझे शंका थी. यह कैसे कर पायेंगे. क्या करती मैं चली गयी.
बहन के यहाँ बच्ची का नामकरण संस्कार हुआ. बहुत पूजा पाठ हुआ. गृह शांति के लिए पूजा-पाठ, हवन –यजन किया गया. मेरा तीन दिन तो बहन के पड़ोसियों के यहाँ जाने में, यहाँ वहां घुमने में ही बीत गया. जिस दिन मुझे वापस आना था उस दिन रविवार था. पति और बच्चे सभी घर पर ही थे. जब मैं गाड़ी से घर के पास उतरी तो अपने पति और बच्चे को वहां खड़ा पाया. वे मेरी प्रतीक्षा में खड़े थे. जब उनलोगों ने मुझे देखा उनके चेहरे पर ख़ुशी छा गयी. मेरे पति मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे. बच्चे दौड़कर मेरे पास आये और मुझसे इस तरह से लिपट गए मानो मैं उनसे काफी दिनों से अलग थी.
अब हम सब साथ साथ अपने घर गए. घर के अन्दर जाते ही एक सुखद अहसास हुआ. यह मेरा अपना घर –जो मेरे लिए, मेरे पति के लिए और बच्चों के लिए बहुत खास है. जब मैं अपने घर में अपने बच्चों को हँसते-मुस्कुराते देखती और सुनती हूँ – तो मेरे अन्दर एक विशेष अनुभूति का संचार हो जाता है. कहा गया है एक हँसते मुसुराते परिवार के चारो तरफ का परिवेश भी हँसता रहता है. बच्चों की किलकारियों की आवाज जब आस पास के पेड़ पौधों तक पहुँचती है तो वे भी हँसते मुस्कुराते प्रतीत होते हैं. और जब घर में ऐसा वातावरण रहे तो चारों ओर  सकारात्मक उर्जा का संचार होता है. लोग सारे दुख दर्द भूलकर वर्तमान में खो जाते हैं. ऐसे में जी चाहता है कि समय की गति यही रुक जाये और यह सुखद अहसास सतत बना रहे. मैं तो मानती हूँ कि जिसे प्यार करने वाला पति और फूल जैसे प्यारे बच्चे मिल जाये उसका घर परिवार रूपी बगिया सदैव हरी-भरी रहती है.
जब मेरे बच्चों ने मुझे कई बार यह कहा कि मम्मा आप तीन दिन बाद आयी हो लेकिन लगता है कि आप कई साल के बाद आयी हो. हमने आपको बहुत मिस किया. मुझे अपने खास का अहसास हुआ. पति ने मुंह से कुछ  कहा नहीं लेकिन उनकी आखें भी कह रही थी कि उन्होंने भी मुझे बहुत मिस किया. वह क्षण मुझे आज भी जब याद आती है तो मेरा मन मुस्काने लगता है.

Mar 13, 2015

मेहनत और भाग्य से घर का सपना पूरा हुआ

जब भी मैं यह गाना सुनती कि एक बंगला बने न्यारा तो मन ही मन सोचती: ईश्वर
मेरे घर के सपना को कब पूरा करेंगे. किसी छोटे शहर में भी अपना एक घर होना बहुत बड़ी बात होती है. इसके लिए सबसे जरुरी है एकमुश्त बड़ी रकम, जो मेरे लिए बहुत मुश्किल था. घर का खर्च, बच्चों की पढाई बचत के नाम पर मात्र कुछ हजार होते थे. खैर, जब अन्य बहुत सारे लोगों को किराये के मकान में देखती तो मन को खुद ही संतोष दिलाती, ये लोग भी तो हैं, इनके पास भी तो अपना घर नहीं है. मेरे ही घर के सामने एक और परिवार रहता था. उस घर का आदमी फ़ोन पर ज़ोर से बातें करता था, यह बात ग्राउंड फ्लोर पर रह रहे मकान मालिक को पसंद नहीं आयी, घर खाली करने का फरमान दे दिया. कुछ मकान मालिक तो जूते-चप्पल गिना करते थे. मुझे भी कई बार मकान बदलना पड़ा.
एक दिन हमने मन में ठान लिया कि चाहे जो भी हो जाये अपना घर लेने की कोशिश करनी चाहिए. हमने घर के लिए एक बजट बनाया और घर सर्च करने लगी. कई घर देखे. कुछ तो पसंद नहीं आयी, कुछ के डॉक्यूमेंट पुरे नहीं थे. खैर जो होना होता है हो के ही रहता है. प्रथम प्रयास में एक घर पसंद आया लेकिन वह हमारे बजट में नहीं था. कोई तीन लाख ज्यादा का था.



मैंने अपने पति को एक आईडिया दिया. क्यों न हम इसका कोई प्लाट डाल दें. हमने अपनी बचत से दो प्लाट खरीद लिये. साथ ही साथ अपनी बचत को भी जारी रखा. कोई दो साल बाद हमें अपने प्लाट को सेल करने का ऑफर आया. वह भी बहुत अच्छे दाम पर. हमने अपना प्लाट बेचने से  पहले अपने लिए घर देखना शुरू किया. कोई एक महीने के बाद एक अपार्टमेंट में एक घर पसंद आया. लेकिन यहाँ भी कुछ रकम का अंतर था. लेकिन जब जो चीज आपके पास आनेवाला होता है तो आकर ही रहता है. उस घर के मालिक को भी पैसों की जरुरत थी. दरअसल वह अपना घर अपनी बेटी की शादी के लिए रकम जुटाने के लिए बेच रहे थे. उन्होंने मुझे एक ऑफर दिया कि जो थोड़ी सी रकम शेष रहती है वह आप मुझे दो महीने बाद दे देना. कोई प्रॉब्लम नहीं है. अंधे को क्या चाहिए – दोनों आँखें. हम खुश तो थे लेकिन दो महीने बाद भी वह रकम कहाँ से आयेगी. यह समस्या थी. शायद उपरवाला यह सब देख रहा था. हम जो प्लाट बेचना चाहता था, उसका अचानक रेट बढ़ गया और हमारा काम बन गया. उस सज्जन व्यक्ति ने अपने कहे अनुसार मकान की लिखा-पढ़ी कर दी और हम लोगों ने भी तय समय सीमा के अन्दर सारी रकम चुका  दी. आज हमलोग अपने घर में सानंद रह रहे हैं. ईश्वर की लाख कृपा है. मेहनत और भाग्य दोनों ने मिलकर हमारे घर के सपना को पूरा कर दिया. 

Feb 18, 2015

जब अपने 'हक' के लिए धरने पर बैठी दुल्हन


18 फरवरी 2015 बिहार के एक इलाके में 'पकड़ौआ शादी' का प्रचलन रहा है जिसमें लड़के का अपहरण कर उसकी जबरन शादी करा दी जाती है।ऐसा एक मामला बेगूसराय ज़िले के मकदमपुर गांव का है जहां दुल्हन बारात लेकर ससुराल पहुंची और घर के सामने ही धरने पर बैठ गई। बीती शाम मुखिया ने जूस पिलाकर उनका धरना और अनशन समाप्त कराया।

लड़के वाले जहां शादी से ही इनकार कर रहे हैं वहीं लड़की पक्ष का कहना है कि शादी लड़के की मर्जी से हुई थी पर दहेज की मांग पूरी न करने से उन्हें परेशान किया जा रहा है। दरअसल भरौल गांव के महाकांत ईश्वर की बेटी प्रीति कुमारी की शादी पिछले साल अप्रैल में मकदमपुर के धीरज ठाकुर से हुई थी। महाकांत ईश्वर कहते हैं, "शादी के दौरान ही लड़के वाले और दहेज की मांग करने लगे, तू-तू मैं-मैं होते हुए मामला बढ़ गया।"

धीरज और उसके परिवार की ओर से कई प्रयासों के बावजूद बात नहीं हो पाई, लेकिन नाते-रिश्तेदारों के मुताबिक़ मामला पकड़ौआ शादी का है। मंसूरचक थाना प्रभारी सर्वजीत कुमार के मुताबिक़, "लड़के के भाई ने यह प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि धीरज का अपहरण शादी करवाने के उद्देश्य से किया गया है।"

सर्वजीत के अनुसार पुलिस ने धीरज को शादी स्थल से जब बरामद किया तब तक शादी हो चुकी थी। इस बीच अपहरण के आरापों में प्रीति के पिता सहित कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया।

इस तरह की शादियों में हर पक्ष खुद को सही ठहराता है। लड़की वाले जहां दहेज और सामाजिक परंपरा का हवाला देते हैं वहीं लड़के और उनके परिवार वाले व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बात करते हैं।

तर्क चाहे जो हो पर प्रीति के लिए अब मानो ससुराल में दाखिल होना ही एकमात्र विकल्प है। प्रीति ने बीते साल दिसंबर में पटना जाकर बिहार राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद आयोग की सदस्या रीना कुमारी ने इस मामले में हस्तक्षेप किया।

रीना कुमारी मानती हैं कि प्रीति और धीरज की 'पकड़ौआ शादी' हुई थी। लेकिन साथ ही वो कहती हैं कि इसमें लड़की की कोई ग़लती नहीं है और पूरी कोशिश है कि प्रीति को उनका हक मिले।

वहीं सामाजिक कार्यकर्ता और पटना विश्वविद्यालय की प्राध्यापक डेजी नारायण के मुताबिक इस 'मध्ययुगीन परंपरा' की जड़ में दहेज प्रथा है।डेजी कहती हैं, "दहेज ऐसी शादियों का बड़ा कारण है। ऐसी शादियों में लड़की चारों तरफ से घिर जाती है और उस पर कई तरह के अत्याचार होते हैं। लेकिन दहेज जैसी बुराई से बचने के लिए इस तरह के अपराध करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।"

साभार : अमर उजाला

Feb 17, 2015

कांग्रेस कार्यकर्ता लड़ाई जारी रखेंगे: सार्जन

तेघड़ा: कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शनिवार को तेघड़ा अनुमंडल कार्यालय पर प्रदर्शन किया और धरना दिया। कांग्रेस कार्यकर्ता केंद्र सरकार की भूमि अधिग्रहण कानून का विरोध कर रहे थे।


इस अवसर पर एक सभा भी आयोजित की गई। अध्यक्षता कांग्रेस पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष महेंद्र कुंवर ने की। संचालन राजीव रंजन सिंह ने किया।

सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष अभय कुमार सिंह सार्जन ने केंद्र की मोदी सरकार की जमकर आलोचना की। कहा कि मोदी सरकार किसानों की जमीन को कारपोरेट घरानों के हाथों सौंपने के काम में लगी हुई है। बोले, यह सरकार किसान विरोधी है। श्री सार्जन ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता किसानों व गरीबों के हित में लड़ाई जारी रखेंगे।

इस अवसर पर सुबोध सिंह, चुनचुन राय, रामवदन सिंह, लखन पासवान आदि मौजूद थे। सभा उपरांत तेघड़ा एसडीओ सुभाषचंद्र मंडल को कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने एक स्मार पत्र सौंपा।

साभार : दैनिक जागरण

Jan 23, 2015

Happy Republic Day 2015

Happy Republic Day 2015 
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