Apr 26, 2020
Community Kitchen Dularpur Teghra Begusarai Bihar
Apr 14, 2020
Bihar Kesari Dr Krishna Singh Freedom Fighter Chief Minister of Bihar
बिहार केसरी डा० श्रीकृष्ण सिंह
लाल भभुका चेहरा, विशाल वक्षस्थल, उन्नत ललाट पर रोली, माथे पर गाँधी टोपी, मस्त कुंजर की चाल, हिमालय की बुलन्दी, सागर की गहराई, कुछ में -कर गुजरने की तमन्ना लिए एक दैवी शक्ति के संस्कार से संपृक्त, एक हाथ -दर्शन का महान ग्रन्थ गीता और दूसरे हाथ में कृपाण । भगवान परशुराम की वंश-परम्परा, मुँह में चारो वेद, पीठ पर तीर भरे तरकस के सिद्धांत से आंकल लिप्त नवजवान मुंगेर के कष्टहरिनी घाट पर अंग्रेजों को भगाने और भारत को स्वतन्त्र कराने का संकल्प लेनेवाला यह कौन है ? भीड़ में कौतुहल है । उसके · साथ कुछ वकील हैं, किसी ने परिचय देते हुए कहा कि माऊर, बरबीघा. मुंगेर निवासी बाबू हरिहर प्र० सिंह के लड़के श्रीकृष्ण सिंह वकील हैं । किसे पता था कि आगे चलकर वही नोवजवान बिहार का निर्माता, राज्य का भाग्य विधाता और चलीस वर्षों तक बिहार की नस-नाड़ियों का संचालक, कर्ता-धर्ता विहार केसरी डा० श्रीकृष्ण सिंह बनेगा ।
डा० श्रीकृष्ण सिंह का जन्म २९ अक्टबर १८८५ को कार्तिक शुक्ल पक्ष "पंचमी के दिन हुआ था। बे पढ़ने में बड़े प्रतिभाशाली थे । एम०ए०, बी०एल० "करने के बाद उन्होंने १ अप्रील १९१५ को मुंगेर वकालत खाने में नये वकील के रूप में पदार्पण किये । वकालत के अतिरिक्त वे अपना पूरा समय किसान -आन्दोलन में लगाने लगे । खुदीराम बोस की सहादत, भगवान तिलक का "स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है" का नारा उन्हें अनुप्रेरित कर रहा था । न्न दिन में खाने की चिंता न रात में सोने का गम । देश कैसे आजाद हो, गरीबी कैसे मिटे, किसान कैसे खुशहाल हों, इसी ताने-वाने में लगा श्रीकृष्ण, भारत प्रोपदी का चीरहरण दुष्ट दुयोंधन अंग्रेज शासक न करने पावे, इसके लिए सतत् जागृत, सदैव सतर्क, सर्वस्व न्योछावर की भावना से तत्पर ।
लोकमान्य तिलक ने होम रूल आन्दोलन प्रारम्भ किया। बिहार में २९ अगस्त १९२१ से वे गाँव- गाव श्री कृष्ण सिंह पूरा बही कार्यकर्त्ता वन गये । घूमकर असहयोग आन्दोलन के लिए अलख जगाने लगे । वे उतने ओजस्वी वक्ता थे कि उनके भाषण के बाद मूर्दों में भी जान आ जाती थी । जहाँ कहीं भी इनके 'भाषण का कार्यक्रम रहता, रामलीला, रासलीला की तरह आसपास के गाँवों से जनसमुद्र उमड़ पड़ता था। उनके भाषण के बाद इलाके का तेवर ही बदल जाता था। सरकारी स्कूल, कॉलेज, कार्यालय वीरान पड़ने लगे। की वंशी पर व्रज के वासी सुध-बुध खोकर नाचने लगे खड़गपुर में किसान उसमें इनका सिंह गर्जन सुनकर उसी सभा में इन्हें बिहार केसरी की पदवी मिली जबतक इतका भाषण चला श्रोता किसानों की दुर्दशा का वर्णन सुनकर रोते रहे। जब इन्होंने जन चेतना का
शंखनाद फूका सारा बाता- वरण इनक्लाव के गगनभेदी नारे से गर्म हो उठा। अब बिहार केसरी अंग्रेज
की नजर में बिहार के सबसे खतरनाक व्यक्ति हो गये। मुहम्मद जुफेर और अन्यों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। प्रथम बार श्रीबाबू को एक वर्ष का सश्रम कारावास मिला। वे १९२३ में रिहा किये गये ।
१९२७ में श्रीबाबू बिहार विधान परिषद् के लिए निर्वाचित बे उसी वर्ष सर्वसम्मत विपक्ष के नेता चुने गये। विपक्ष के नेता के रूप में सदन में अपने भाषणों और बाहर में अपने कृत्यों से उन्होंने इतनी ख्याति अर्जित कर ली कि वे देश के गिने-चुने नेताओं में पाक्तय हो गये ।
कांग्रेस कार्यसमिति के निर्णय के अनुसार डा० श्रीकृष्ण सिंह ने १९२९ में बिहार विधान परिषद् की सदस्यता तथा नेता विपक्ष के पद से त्यागपत्र दे दिया।
बापू के आन्दोलन का दूसरा दौर चला। राष्ट्र पिता की मान्यता थी कि नमक देश के जन-जन को अमीर-गरीब सबको जोड़ने वाला रामरस है इस पर कर नहीं लगना चाहिए। विरोध में उन्होंने नमक बनाने का आदेश दे दिया जो देश में नमक सत्याग्रह के नाम से चला मुंगेर जिले (अब बेगुसराय) के गढ़पुरा गाँव में नमक सत्याग्रह के डिक्टेटर श्रीबाबू थे वे नमक बना रहे थे। पानी वाप्य तेजी से निकल रहे थे, कड़ाही लाल थी, उसकी में पुलिस ने सत्याग्रह स्थल
खल दल खोल रहा था,
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बंडी एकदम गर्म इतने को घेर लिया। डंडे बरसने लगे। पुलिस ने कड़ाही उलटने का प्रयास किया। श्रीबाबू ने दोनों हाथ से कड़ाही पकड़कर उसे छाती से सटा लिया। हाय छाती आग से जल रहे थे और सिर पर पैर पर देह पर तड़ातड़ पुलिस की लाठियां पढ़ रही थी। उनका सर फट गया। कपड़े रक्त से लाल हो गये, मगर कड़ाही की दोनों मुट्ठी हाथ में शरीर कड़ाह पर उन्हें पकड़कर पुलिस गाड़ी पर लाद दिया गया। भीड़ हटने का नाम नहीं, श्रीबाबू के अपील पर भीड़ हटी मुकदमा चला। श्रीबाबू को तुरत सजा दे दी गई। पहले भागलपुर, फिर हजारीबाग जेल में बन्द रहे छः महीने बाद उन्हें अक्टूबर को रिहा किया क्या ११ नवम्बर १९३० को
Mar 28, 2020
स्वतंत्रता सेनानी तारणी प्रसाद सिंह, बजलपुरा, तेघड़ा, बेगुसराय, बिहार
स्वतंत्रता सेनानी श्री तारिणी प्रसाद सिंह (बजलपुरा, तेघड़ा) से संबंधित एक और आलेख मिला है जिसे मैं यहाँ शेयर कर रही हूँ .
Jul 28, 2019
Father Was Everything for Me
आज लगभग साढ़े दस बजे मेरे पिताजी प्रोफेसर चंद्रमौलि चौधरी को सीने में तेज दर्द हुआ. उन्होंने अपने हर्रख स्थित मकान में रह रहे शिक्षक राम उदय जी को इसके बारे में बताया।
राम उदय जी ने स्थानीय डॉक्टर मुन्नाजी से संपर्क किया और उनके पास लेकर गए. रक्त चाप बहुत ज्यादा था. डॉक्टर ने उनको बेगूसराय के एक हॉस्पिटल ग्लोकल हॉस्पिटल में भरती करा दिया। ऑक्सीजन लगया गया और रक्त चाप को नियंत्रण में लाने का प्रयास चलता रहा. रात के दो बजे तक मेरा भाई सत्य प्रकाश भी पूर्णिया से बेगूसराय अपने वाहन से आ गया.
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| बेगूसराय स्थित आवास |
3 July 2019
ग्लोकल हॉस्पिटल में कोई सुधार न देखते हुए वहां से पटना रेफर कर दिया गया. पटना में मेडिका हार्ट इंस्टिट्यूट रोड नंबर १ राजेंद्र नगर में पिताजी को एम्बुलेंस द्वारा लाया गया. बेगूसराय से पटना आते वक़्त मकान में काम कर रहे सारे मिस्त्री, मजदूर और पेंटर भी उनसे मिलने आये और पिताजी ने सबको हाथ हिलाकर काम करते रहने का संकेत दिया। मेडिका हार्ट इंस्टिट्यूट को बिहार का सबसे अच्छा हार्ट का हॉस्पिटल माना जाता है. वहां डॉक्टर प्रभात कुमार सबसे बड़े डॉक्टर हैं. मेडिका में पिताजी की तबीयत उस दिन तक ठीक थी.
4 July 2019
तीन तारीख को हम लोगों ने भी दिल्ली से पटना जाने का प्लान बनाया। 4 की सुबह को हमने दिल्ली से पटना की फ्लाइट ली और साढ़े ग्यारह बजे तक हॉस्पिटल आ गए. उस समय तक पिताजी ठीक थे. सबसे बात की. हमें आशिर्बाद दिया। दो बजे डॉक्टर ने बताया कि उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है. हम लोग भी उम्मीद लगाए थे कि भगवान् अच्छी खबर सुनाएंगे। इस प्रकार 4 तारीख भी निकल गया.
5 July 2019
आज सुबह से ही मन में बैचैनी थी. आज पिताजी कुछ सुस्त नजर आ रहे थे. सुबह में कोई दस बजे कुछ खाया। दोपहर को उनको सेंट्रल लाइन वाला पाइप लगाया गया और चार बजे उनका सीपीआर( Cardio-Pulmonary Resuscitation) हो गया. मेरे पति ने ICU में डॉक्टर को पिताजी का सीपीआर करते देखा। उस समय एक डॉक्टर ने उनसे कहा कि अब चांस काम है. उसके बाद उनको वेंटीलेटर का सपोर्ट दिया गया. उनकी हालत बिगड़ने लगी थी.
6 July 2019
यह दिन हम सबके जीवन का सबसे दुखद दिन साबित हुआ. सुबह से ही बार बार पिताजी को ICU के विंडो से देखने जाती रही. यह सोचकर कि शायद पिताजी हमारी राह देख रहे हों. लेकिन वह तो हम सबसे पल पल दूर होते जा रहे थे. आज दिल्ली से मेरे बच्चे वृद्धि और आशु भी अपने मौसा जी के साथ फ्लाइट से पटना पहुंचे। सब इस उम्मीद में थे कि नानाजी ठीक होकर हमारे साथ चलेंगे। लेकिन विधाता को तो कुछ और ही मंजूर था. आज के दिन शाम को 5 बजकर 37 मिनट पर मेरे पिताजी हम सबको रोते बिलखते छोड़ सदा सदा के लिए चले गए.
देर रात तक उनका पार्थिव शरीर बेगूसराय स्थित उनके आवास सी एम् हाउस हर्रख पर लाया गया.
7 July 2019
आज पिताजी को अंतिम विदाई देने का दिन था. मेरे गांव मकसपुर से कुछ लोग आये. बेगूसराय के स्थानीय लोग भी आये. पिताजी को सिमरिया लाया गया. रास्ते में घनघोर बारिश होने लगी. सब लोग परेशान थे कि अंतिम संस्कार कैसे होगा। लेकिन जैसे ही हमलोग सिमरिया पहुंचे मानो प्रकृति ने भी हमारा साथ देते हुए बादलों को कहीं और भेज दिया। मेरे भाई सत्य प्रकाश ने पिताजी को मुखाग्नि दी. इस प्रकार वे पंच तत्व में विलीन हो गए.
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| प्रोफेसर चंद्रमौलि चौधरी विभागाध्यक्ष, रसायन विभाग, के एस एस कॉलेज, लखीसराय, भागलपुर विश्वविद्यालय |
कर्मकांड के मुताबिक पिताजी का श्राद्ध किया गया. हमारे पिताजी आज जहाँ कहीं भी होंगे हम सबको देख रहे होंगे और हम सबको आशर्वाद दे रहे होंगे।
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| श्राद्ध कार्यक्रम |
पिताजी ! आप हम सबको बहुत याद आते हैं....
Nov 13, 2018
Lok Aastha Ka Mahaparv Chhath Pooja लोक आस्था का महापर्व छठ
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| छठ पूजा 2018 |
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| अस्ताचल गामी सूर्य की आराधना करते छठ व्रती (आई टी ओ , दिल्ली घाट) |
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| छठ पूजा समिति और दिल्ली सरकार द्वारा बहुत ही उत्तम व्यवस्था |
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| यह जानकारी भी उपयोगी है |
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| पंडाल के अन्दर छठ का डाला और प्रज्वलित दीप |
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| छठ का डाला और मोबाइल पर बात - दोनों साथ साथ |
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| छठी माता की आराधना |
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| सुरक्षा में तैनात जवान |
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| नदी के ठीक उपरी भाग में बना छठ तालाब. यहाँ का पानी यमुना नदी के पानी से ज्यादा साफ़ लगा |
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| पूजा की तैयारी |
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| सांस्कृतिक कार्यक्रम |
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| छठ पूजा एक विहंगम दृश्य |
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| दो लेयर में पूजा एक तालाब तो दूसरा यमुना नदी |
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| दंड देते एक व्रती |
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| छठ के अवसर पर एक यह - ऑफर भी |































